ईरान-अमेरिका जंग के बीच उत्तर कोरिया का बड़ा कदम (सोर्स-सोशल मीडिया)
North Korea Nuclear Warship: उत्तर कोरिया सैन्य परमाणु की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए किम जोंग उन ने अपने परमाणु विध्वंसक को पूरी तरह तैयार कर दिया है। इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच प्योंगयांग की इस सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारी हलचल और चिंता पैदा कर दी है। किम ने लगातार दो दिनों तक इस युद्धपोत की मारक क्षमताओं का बहुत ही बारीकी से निरीक्षण किया और नौसैनिक ताकत बढ़ाने का संकल्प लिया। दुनिया अब यह देख रही है कि क्या उत्तर कोरिया इस तनावपूर्ण माहौल में कोई नया मोर्चा खोलने की योजना बना रहा है।
ईरान और इजरायल के बीच जारी महायुद्ध के दौरान उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने एक बहुत ही चौंकाने वाला और सख्त फैसला लिया है। किम ने अपने सबसे आधुनिक परमाणु विध्वंसक युद्धपोत को किसी भी संभावित हमले के लिए पूरी तरह से तैयार कर रेड अलर्ट पर रख दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी नौसेना अब परमाणु हथियारों से लैस होकर किसी भी दुश्मन को करारा और मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।
प्योंगयांग की आधिकारिक समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार किम जोंग ने लगातार दो दिनों तक नाम्पो शिपयार्ड में इस नए युद्धपोत की क्षमताओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने क्रूज मिसाइलों के सफल परीक्षण का अवलोकन किया और सेना को अपनी पूर्व-आक्रमण हमला क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए। यह नया विध्वंसक 5,000 टन का है और इसमें परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ कई अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियां भी लगाई गई हैं।
दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया ने यह शक्तिशाली युद्धपोत रूस के साथ बढ़ते सैन्य संबंधों और तकनीकी सहायता के जरिए ही बनाया है। किम जोंग ने अपने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से अगले पांच वर्षों में हर साल दो ऐसे आधुनिक युद्धपोत बनाने का बहुत ही बड़ा लक्ष्य रखा है। हालांकि कुछ बाहरी विशेषज्ञों ने अभी भी इन जहाजों के पूरी तरह से चालू होने की स्थिति पर अपना संदेह और चिंता जताई है।
किम जोंग ने अपनी इस कार्रवाई के जरिए सीधे तौर पर अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों को एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट चेतावनी भरा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने के प्रयास अब संतोषजनक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं जो समुद्री संप्रभुता की रक्षा करेंगे। हालांकि किम ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत का दरवाजा अभी भी खुला रखा है बशर्ते वाशिंगटन अपनी परमाणु निरस्त्रीकरण की पुरानी जिद छोड़ दे।
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दुनिया पहले से ही ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के भयानक परिणामों और लाखों मासूमों की जान जाने के डर से बहुत ज्यादा सहमी हुई है। ऐसे में उत्तर कोरिया की यह नई सैन्य गतिविधि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक और बड़ी चुनौती और सरदर्द बनकर सामने आई है। लोग अब केवल यही उम्मीद कर रहे हैं कि ये ताकतवर देश संयम बरतें ताकि मानवता को एक और महाविनाशकारी युद्ध की आग में न जलना पड़े।