Arms Sales: ट्रंप प्रशासन की मनमानी? बिना संसद की मंजूरी पश्चिम एशिया के चार देशों को मिलेंगे अरबों के हथियार

US Arms Sales: अमेरिका ने पश्चिम एशिया की चार देशों के 8.6 अरब डॉलर के हथियारों की पेशकश की है। ट्रंप ने संसद की मंजूरी के बिना यह कदम उठाया है। उनका दावा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म हो गया है।
Arms Sales: US Offers 8.6 Billion Dollar Weapons Deal To Four West Asia Allies Amid Iran Tension
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
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West Asia US Arms Sales: पश्चिम एशिया में अमेरिकी हथियारों की बिक्री की दिशा में अमेरिका ने बहुत बड़ा और अहम कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व के चार प्रमुख सहयोगी देशों को भारी हथियारों की पेशकश की है। इन प्रमुख देशों में इजरायल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात विशेष रूप से शामिल हैं। अमेरिका इन सभी देशों को कुल 8.6 अरब डॉलर के आधुनिक हथियारों का बहुत बड़ा रक्षा सौदा देने जा रहा है।

पश्चिम एशिया में अमेरिकी हथियारों की बिक्री के इस बड़े फैसले ने अमेरिकी संसद में भी भारी हलचल और विवाद मचा दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस की कड़ी समीक्षा को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि इसमें आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली और घातक हथियार शामिल होंगे। इस बड़े कदम से पश्चिम एशिया में हथियारों की एक नई रेस शुरू होने की बहुत बड़ी आशंका है।

रक्षा समझौते के बीच ट्रंप का बड़ा दावा

इस बड़े रक्षा समझौते के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत ही अहम बयान दिया है। उन्होंने अपने सभी सांसदों को स्पष्ट बताया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध अब पूरी तरह खत्म हो गया है। यह सैनिक कार्यवाही कांग्रेस की पूर्व अनुमति के बिना ही अचानक शुरू कर दी गई थी। अब इसके लिए तय 60 दिन की कानूनी सीमा भी पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस को लिखे एक आधिकारिक पत्र में मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी विस्तार से दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच कोई भी गोलीबारी नहीं हुई है। उनका पक्का मानना है कि 28 फरवरी 2026 को जो कड़ा संघर्ष शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है। ट्रंप इस पत्र के जरिए संसद के साथ चल रहे अपने भारी विवाद को जल्दी खत्म करना चाहते हैं।

कांग्रेस की अनुमति का नियम

अमेरिका में 1973 के युद्ध शक्ति प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्यवाही की जानकारी तुरंत देनी होती है। इस कड़े नियम के मुताबिक कांग्रेस को सूचना देना और बिना मंजूरी 60 दिनों के भीतर इसे खत्म करना जरूरी है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ बातचीत में अभी बहुत ज्यादा अनिश्चित बनी हुई है। वह ईरान के मौजूदा प्रस्तावों से बिल्कुल खुश नहीं है लेकिन उन्होंने कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह खुले रखे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कर दावा किया कि इस हालिया संघर्ष के बाद ईरान की सेना काफी कमजोर हो चुकी है। उनके मुताबिक ईरान के पास अब कोई मजबूत नौसेना या आधुनिक वायु सेना बिल्कुल भी नहीं बची है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार अमेरिकी नाकाबंदी से भी ईरान को 4.8 अरब डॉलर का बहुत भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है। ट्रंप शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं लेकिन वार्ता विफल होने पर सैनिक कार्रवाई का विकल्प भी उनके पास मौजूद है।

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