Troop withdrawal: ईरान युद्ध विवाद पर ट्रंप का NATO को बड़ा झटका! जर्मनी से बुलाएंगे 5000 सैनिक वापस

US Troop Withdrawal: जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की बड़ी खबर आई है। ट्रंप और जर्मन चांसलर मर्ज के बीच ईरान युद्ध को लेकर बहस के बाद अमेरिका ने जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुलाने का फैसला किया है।
Troop Withdrawal: US To Pull 5000 Troops From Germany After Trump Spat With Chancellor Over Iran
अमेरिकी सैनिक (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US Setback For NATO Troop Withdrawal From Germany: ताजा जानकारी के अनुसार अमेरिका ने यूरोप में नाटो को एक बहुत बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने शुक्रवार को अधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि वह अपने सहयोगी देश जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुला रहा है। यह चौकाने वाला कदम उस समय उठाया गया है जब राष्ट्रपति ट्रम्प और जर्मन चांसलर की टिप्पड़ी से यूरोप से विरोध गहरा गया। पेंटागन ने यह कदम ट्रंप और जर्मन चांसलर के बीच हुई बहस के बाद उठाया है।

इस पूरे विवाह की प्रमुख वजह राष्ट्रपति ट्रंप की इरान युद्ध को लेकर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से हुई एक तीखी बहस है। इस बहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए सैनिकों की संख्या में कटौती करने की धमकी दी थी। अमेरिका का यह फैसला यूरोप और नाटो देशों के लिए बहुत ही सख्त कूटनीतिक और कड़ा संदेश है। पेंटागन के इस कदम से यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ट्रंप और फ्रेडरिक मर्ज की बहस का कारण

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को ईरान युद्ध पर विवादित टिप्पड़ी की थी। उन्होंने कहा था कि दो महीनों से चल रहे युद्ध को ख़त्म करने की बातचीत में ईरान अमेरिका को अपमानित कर रहा है। इसके जवाब में ट्रंप ने तीखे लहजे में कहा कि मर्ज को रूस और युक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें अपने देश को ठीक करने पर ध्यान देना चाहिए। ईरान युद्ध पर उन्हें अपना टाइम वेस्ट नहीं करना चाहिए।

पेंटागन का आधिकारिक बयान

पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जर्मनी की हालिया बयानबाजी बहुत ही अनुचित थी। उन्होंने यह भी कहा कि नाटो देशों से सेना हटाकर राष्ट्रपति इन टिप्पड़ियों का बिलकुल सही जवाब दे रहे हैं। सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया 6 से 12 महीनों में पूरी हो जाएगी। पेंटागन की इस कटौती से यूरोप में अमेरिकी सैनिकों का स्तर 2022 से पहले के स्तर पर आ जाएगा। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद उस समय के राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूरोप में सैनिकों की संख्या बढाई थी। लेकिन अब अमेरिका उन फैसलों को पलट रहा है।

बता दें कि यूरोप में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है और जर्मनी नाटो का एक अहम सदस्य है। यहां अभी लगभग 35000 सैनिक तैनात हैं। यहां एक अहम ट्रेनिंग हब भी है। पिछले कुछ महीनों से जर्मनी और नाटो ट्रम्प के निशाने पर जोरो से हैं। ट्रंप ने ईरान युद्ध में हार्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अपनी नौसेना न भेजने पर यूरोपीय सहयोगियों और नाटो की कड़ी आलोचना की थी।

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