Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

मध्य एशिया में भारत-चीन पर नया खतरा, मुस्लिम वर्ल्ड बना रहा ‘महारण’ का समीकरण, कौन-कौन लिख रहा तबाही की पटकथा?

World News: दुनिया की राजनीति में एक बड़ा और गहरा बदलाव देखने को मिल रहा है। मध्य एशिया में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा और रणनीति को लेकर एक नई और मजबूत दोस्ती आकार ले रही है।

  • By अभिषेक सिंह
Updated On: Jan 18, 2026 | 06:34 PM

सांकेतिक तस्वीर (AI जनरेटेड)

Follow Us
Close
Follow Us:

Central Asia Strategy: दुनिया की राजनीति में एक बड़ा और गहरा बदलाव देखने को मिल रहा है। तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा और रणनीति को लेकर एक नई और मजबूत दोस्ती आकार ले रही है। हालांकि यह तालमेल अभी पूरी तरह से लिखित समझौते के रूप में सामने नहीं आया है, लेकिन इसका असर मध्य पूर्व से लेकर दक्षिण एशिया और चीन की सीमाओं तक महसूस किया जाने लगा है।

मुस्लिम देशों की राजनीति में यह नया समीकरण पुराने तौर-तरीकों को चुनौती दे रहा है। यह गठजोड़ केवल तीन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार मध्य एशिया तक जुड़ रहे हैं। इस नई साझेदारी में हर देश की अपनी अलग भूमिका है। मध्य एशिया में यह भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। साथ ही पाकिस्तान के दोस्त की भी नींद उड़ाने वाला है।

कैसे लिखी जा रही तबाही की स्क्रिप्ट?

दरअसल, तुर्की अपनी पुरानी ऐतिहासिक पहचान को फिर से जिंदा करना चाहता है, सऊदी अरब अपनी आर्थिक ताकत और धार्मिक प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता के साथ इन दोनों के बीच एक पुल का काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह नया गुट दुनिया के नक्शे पर प्रभाव के नए क्षेत्र बना सकता है।

सम्बंधित ख़बरें

Saudi Arabia ने डिस्पोजेबल पैकेजिंग पर अल्लाह का नाम लिखने पर लगाया प्रतिबंध, धार्मिक सम्मान का फैसला

ईरान में प्रदर्शनकारियों के सिर में मारी गई गोली, मौतों का आंकड़ा 16 हजार के पार, खामेनेई ने भी किया स्वीकार

ताइवान में पकड़ा गया जिनपिंग का जासूस पत्रकार, सालों से कर रहा था चीन की मदद, लीक की बहुत सारी गुप्त सूचनाएं

कौन है ईरान की ‘आयरन लेडी’ नाजनींन बरादरन? जिसने उड़ाई खामेनेई सरकार की नींद, गिरफ्तारी से मचा बवाल

हथियार और पैसे की नई साझेदारी

तुर्की की भूमिका इसमें काफी अहम है। साल 2010 के बाद से तुर्की ने ऑर्गनाइजेशन ऑफ तुर्किक स्टेट्स के माध्यम से अज़रबैजान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज़्बेकिस्तान जैसे देशों के साथ अपने रिश्ते बहुत मजबूत किए हैं। बात अब सिर्फ संस्कृति या भाषा तक सीमित नहीं रही है। तुर्की ने इन देशों को अपने मशहूर बायरकतार टीबी2 ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और सैन्य प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। यह समूह अब एक रणनीतिक ताकत बनता जा रहा है।

मध्य एशिया के नए समीकरण (इन्फोग्राफिक-AI)

दूसरी तरफ सऊदी अरब इस तिकड़ी में अपनी अलग भूमिका निभा रहा है। सऊदी अरब के पास तुर्की जैसी भाषाई पकड़ तो नहीं है, लेकिन सुन्नी मुस्लिम दुनिया में उसका धार्मिक प्रभाव और पैसे की ताकत बहुत बड़ी है। पिछले एक दशक में सऊदी अरब ने अपनी नीति बदली है। अब वह पाकिस्तान में ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है। साथ ही तुर्की के साथ मिलकर सैन्य अभ्यास भी कर रहा है, जो बदलती हुई प्राथमिकताओं को दिखाता है।

चीन के लिए खतरे की घंटी क्यों?

आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान इस नए समीकरण में एक सैन्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान की परमाणु शक्ति उसे इस पूरे इलाके में खास महत्व दिलाती है। साल 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट इस बात का इशारा है कि पाकिस्तान को बाहरी सुरक्षा का भरोसा मिल रहा है। इसके अलावा, तुर्की की रक्षा कंपनियों के लिए पाकिस्तान एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है।

यह भी पढ़ें: ईरान में ट्रंप के डर से पीछे हटे मोदी? चाबहार पोर्ट पर क्यों छिड़ी राजनैतिक रार, जानिए क्या है यह पूरी कहानी

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तुर्की का ऐतिहासिक प्रभाव और सऊदी अरब का धार्मिक नेटवर्क मध्य एशिया में एक साथ काम करेंगे, तो वहां पहले से मौजूद शक्तियों के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। चीन के लिए यह घटनाक्रम सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। चीन हमेशा से अपने पश्चिमी इलाके शिनजियांग में स्थिरता को लेकर सतर्क रहता है। अगर तुर्की और सुन्नी मुस्लिम देशों का प्रभाव चीन की सीमाओं तक पहुंचता है, तो बीजिंग के लिए अपनी आंतरिक और सीमा पार की सुरक्षा को संभालना मुश्किल हो सकता है।

💡

Frequently Asked Questions

  • Que: तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान का यह नया रणनीतिक तालमेल क्या संकेत देता है?

    Ans: यह तालमेल मुस्लिम दुनिया में उभरते एक नए शक्ति केंद्र की ओर इशारा करता है, जहां तुर्की सैन्य तकनीक और ऐतिहासिक प्रभाव, सऊदी अरब आर्थिक व धार्मिक ताकत और पाकिस्तान सैन्य क्षमता व परमाणु शक्ति के साथ एक-दूसरे की भूमिका को पूरक बना रहे हैं।

  • Que: मध्य एशिया में इस नए गठजोड़ से भारत को क्यों चिंता हो सकती है?

    Ans: मध्य एशिया में तुर्की की बढ़ती सैन्य मौजूदगी, सऊदी निवेश और पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका भारत की रणनीतिक पहुंच और प्रभाव को सीमित कर सकती है। खासकर रक्षा सहयोग और प्रभाव क्षेत्रों के विस्तार से भारत के हितों पर अप्रत्यक्ष दबाव बन सकता है।

  • Que: यह समीकरण चीन के लिए खतरे की घंटी क्यों माना जा रहा है?

    Ans: तुर्की और सुन्नी मुस्लिम देशों का बढ़ता प्रभाव अगर मध्य एशिया के रास्ते चीन के शिनजियांग क्षेत्र तक पहुंचता है, तो बीजिंग की आंतरिक सुरक्षा और सीमा स्थिरता पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि चीन इस नए भू-राजनीतिक समीकरण को बेहद सतर्कता से देख रहा है।

New threat to india china in central asia muslim world forming deadly equation

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jan 18, 2026 | 06:34 PM

Topics:  

  • China
  • Pakistan
  • Saudi Arabia
  • Turkey
  • World News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.