नेपाल के पूर्व PM केपी शर्मा ओली को SC से बड़ी राहत, कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश; जानें क्या था मामला
Release KP Sharma Oli Nepal SC: नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को रिहा करने का आदेश दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
केपी शर्मा ओली, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Nepal Supreme Court Orders Release KP Sharma Oli: नेपाल की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब देश के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की रिहाई का आदेश जारी किया। दोनों नेताओं को पिछले महीने 28 मार्च को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई सितंबर 2025 में हुए ‘जेन जी’ (Gen Z) के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों और दमन से जुड़े एक मामले में की गई थी।
क्यों हुई थी KP Sharma Oli की गिरफ्तारी?
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को नेपाल पुलिस ने भक्तपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि उनके कार्यकाल के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जिससे कई नागरिकों की जान चली गई। नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी इसी मामले में उनके आवास से हिरासत में लिया गया था। गृह मंत्रालय द्वारा दायर एक औपचारिक शिकायत के बाद इन गिरफ्तारियों के लिए वारंट जारी किए गए थे।
‘आपराधिक लापरवाही’ का आरोप
सितंबर 2025 में हुए इन भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों ने नेपाल को हिलाकर रख दिया था। इन प्रदर्शनों के दौरान कुल 77 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और सरकारी व निजी संपत्ति को अरबों रुपये का नुकसान हुआ था। पूर्व विशेष अदालत के न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले एक आयोग ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच की।
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आयोग की रिपोर्ट में पाया गया कि अधिकारियों ने खुफिया चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई। रिपोर्ट में इस कार्रवाई को ‘आपराधिक लापरवाही’ और ‘लापरवाही’ के रूप में वर्णित किया गया है। आयोग ने सिफारिश की थी कि ओली, लेखक और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खपुंग पर राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत मुकदमा चलाया जाए। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
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प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गिरी गाज
आयोग ने न केवल राजनीतिक नेतृत्व बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसमें तत्कालीन गृह सचिव गोकर्ण मणि दवाडी, सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख राजू अर्याल, और राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अधिकारियों से अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर चूक हुई जिसके कारण इतनी बड़ी जनहानि हुई।
