

Nepal Flood Tragedy Victims Stories: इंसान कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए लेकिन कुदरत के आगे उसकी एक भी नहीं चलती। जब प्रकृति की चीख सुनाई देती है तो इंसान सिर्फ अपनी बेबसी पर आंसू बहाने को मजबूर हो जाता है। नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद काठमांडू के अस्पतालों का मंजर देख लोगों का कलेजा कंप रहा है।
यहां लगी लोगों की भारी भीड़ और हर पल आती एंबुलेंसों की सायरन जैसी आवाज अपनों की अनहोनी के डर से लोगों की धड़कनों को थमने पर मजबूर कर रही है। तबाही के इस खौफनाक मंजर में किसी का पूरा परिवार आंखों के सामने बह गया, तो किसी के हाथ से जीवनसंगिनी की उंगलियां छूट गई। हर तरफ अपनों को खोने का मलाल, बेबसी और सिसकियों का सन्नाटा पसरा हुआ है।
नुवाकोट से कल्पना मल्ला ने अपने दर्द बयां करते हुए बताया कि मेरी आंखों के सामने ही मेरे पिता, मां, बहन और मासूम बच्चे पानी के तेज बहाव में बह गए। मैं अपने एक बेटे के साथ किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ी, जिससे हमारी जान बच सकी, मलाल इस बात का है कि प्रकृति के इस कहर के आगे मैं बिल्कुल बेबस थी।
नुवाकोट में सुगम मल्ला ने मैंने पानी के तेज थपेड़ों से अपनी मां को खींचकर तो बचा लिया, लेकिन अपनी छोटी बहन को नहीं बचा सका। मां को बचाते वक्त मैंने अपनी बहन को अपना फोन पकड़ाया था। अब वह फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है और मेरी बहन का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है।
नुवाकोट से ही गोमा पंडित की अपनो को खोज रही है। गोमा पंडित ने बताया कि इस भयानक बाढ़ ने मेरा सब कुछ उजाड़ कर रख दिया है। गनीमत रही कि बच्चे उस वक्त घर से बाहर थे, इसलिए उनकी जान बच गई, लेकिन मेरे वृद्ध माता-पिता का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। समझ नहीं आ रहा कि उन्हें कहां ढूंढू। उन्हें ढूंढने के लिए अब मैं अस्पताल-अस्पताल भटक रहा हूं।
रामधर में अचानक पानी के तेज बहाव की आवाज से हम चौक गए। जब तक संभल पाते, पानी करीब आ चुका था। जान बचाने के लिए पहाड़ी पर चढ़ने लगे, तभी डर और जल्दबाजी में पत्नी का पैर फिसल गया। मैंने उसका हाथ कसकर थाम लिया था, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वह उसे मेरे हाथ से छीनकर बहा ले गया।
जीवन भर साथ निभाने का वादा किया था, लेकिन वक्त आने पर उसे बचा न सका। हम तो नेपाल सिर्फ घूमने आए थे, क्या पता था कि जीवन का सबसे बड़ा दर्द यहां मिलेगा। पत्नी को बचाने के लिए मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन कुदरत के आगे मेरी ताकत हार गई।
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रसुवा और नुवाकोट शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह बाढ़ नेपाल और चीन के बीच बहने वाली नदी, भोटे कोशी के ऊपरी इलाकों में हिमस्खलन के कारण आई। गुरुवार दोपहर तक, नेपाल पुलिस ने बताया कि कुल 644 लोग लापता थे, जिनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि भोटेकोसी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद से 290 भारतीय लापता हैं। इस बाढ़ ने हिमालयी देश में भारी तबाही मचाई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि रसुवा जिले में त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 भारतीय कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। इस समूह में तमिलनाडु के 21 भारतीय भी शामिल हैं जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि उसके पास लगभग 90 ऐसे अमेरिकियों के बारे में जानकारी है जो बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं और वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। विदेश विभाग ने पुष्टि की कि नेपाल में तीन अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है और कहा कि अभी तक किसी अमेरिकी की मौत की कोई खबर नहीं है।
इसी तरह, नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में चीनी नागरिक भी लापता हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बुधवार को हुए भूस्खलन के बाद नेपाल सीमा के पास लगभग 100 चीनी नागरिक लापता हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, 127 नेपाली नागरिक भी लापता हैं। विदेशी नागरिकों में 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 25 कनाडाई नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं।