…तो ऐसे शुरू होगा WWIII, चीन अकेले नहीं करेगा ताइवान पर हमला, रूस भी करेगा NATO पर अटैक; मार्क रूट का दावा
NATO China Taiwan: नाटो महासचिव मार्क रूट ने चौंकाने वाला दावा किया है कि चीन ताइवान पर हमले से पहले पुतिन को नाटो देशों पर आक्रमण के लिए मजबूर करेगा, जिससे दुनिया में महायुद्ध छिड़ सकता है।
- Written By: अमन उपाध्याय
नाटो महासचिव मार्क रूट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
World War 3 Alert: दुनिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच नाटो के महासचिव मार्क रूट ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। रूट ने चेतावनी दी है कि चीन ताइवान पर हमले की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नाटो पर हमला करने के लिए मजबूर कर सकता है।
दो मोर्चों पर युद्ध की घातक योजना
ब्रसेल्स में आयोजित ‘रिनिव यूरोप ग्लोबल यूरोप फोरम-2026’ में अपने मुख्य संबोधन के दौरान मार्क रूट ने कहा कि यदि चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई शुरू करता है तो वह कभी भी इसे अकेले अंजाम नहीं देगा। सूत्रों के अनुसार, चीन की रणनीति यह है कि वह रूस को यूरोप में नाटो देशों के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए उकसाए। इससे नाटो की सैन्य शक्ति और संसाधन दो हिस्सों में बंट जाएंगे एक तरफ इंडो-पैसिफिक में ताइवान की रक्षा और दूसरी तरफ यूरोप में रूस का मुकाबला।
चीन-रूस का बढ़ता खतरनाक गठजोड़
मार्क रूट ने इस बात पर जोर दिया कि रूस और चीन का गठजोड़ अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक गंभीर सैन्य खतरा बन चुका है। चीन वर्तमान में यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को हथियार, ड्रोन और अन्य तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। इसके बदले में, रूस न केवल चीन के साथ खड़ा है बल्कि वह उत्तर कोरिया और ईरान के साथ मिलकर भी काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘एक्सिस ऑफ पावर’ वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है और विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
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नाटो को रक्षा बजट बढ़ाने की सलाह
इस उभरते खतरे को देखते हुए, नाटो प्रमुख ने सदस्य देशों से अपने रक्षा बजट में तत्काल वृद्धि करने की अपील की है। उन्होंने यूक्रेन को अटूट समर्थन जारी रखने और आर्कटिक क्षेत्र में सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया, जहां रूस और चीन दोनों सक्रिय हैं। इसके अलावा, उन्होंने जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे इंडो-पैसिफिक देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का भी सुझाव दिया है ताकि चीन के किसी भी आक्रामक कदम को रोका जा सके।
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विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थितिया दर्शाती हैं कि अमेरिका जहां ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक मान रहा है, वहीं चीन की निगाहें पूरी तरह ताइवान पर टिकी हैं। मार्क रूट का यह बयान वैश्विक स्तर पर एक नई सैन्य घेराबंदी की ओर इशारा करता है, जहां आने वाले समय में रूस और चीन की जुगलबंदी नाटो और पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने वाली है।
