नासा ने आर्टेमिस 2 मिशन लॉन्च किया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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NASA का महत्वाकांक्षी आर्टेमिस 2 मिशन लॉन्च, भेजे चार अंतरिक्ष यात्री, 10 दिनों तक लगाएंगे चांद का चक्कर

NASA ने आर्टेमिस 2 मिशन के जरिए 50 साल बाद इंसानों को चंद्रमा की कक्षा में भेजा है। चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन स्पेसक्राफ्ट में गहरे अंतरिक्ष की ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना हुए।

अक्षय साहू

NASA Launches Artemis 2 Mission: लगभग 50 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इंसान एक बार फिर चंद्रमा की ओर लौटने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस 2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा की ओर सफलतापूर्वक रवाना किया। यह प्रक्षेपण कैनेडी स्पेस सेंटर से तय समय पर किया गया।

इस मिशन में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन शामिल हैं। यह दल लगभग 10 दिनों की यात्रा के दौरान चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएगा और फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आएगा। हालांकि यह मिशन चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण परीक्षण उड़ान है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के पास से गुजरेंगे।

अंतरिक्ष में क्या करेंगे एस्ट्रोनॉट?

इस दौरान ओरियन स्पेसक्राफ्ट के लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अन्य जरूरी तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण भविष्य में होने वाले मानव मिशनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें।

आर्टेमिस 2 मिशन की खास बात यह है कि अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर निकलकर गहरे अंतरिक्ष में जाएगा। मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के पीछे वाले हिस्से से गुजरते हुए “लूनर फ्लाईबाय” करना है। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 4,50,000 किलोमीटर दूर पहुंच जाएंगे, जो अब तक किसी भी मानव द्वारा तय की गई सबसे अधिक दूरी होगी।

क्या होता है क्रू टेस्ट फ्लाइट?

यह मिशन एक तरह की “क्रू टेस्ट फ्लाइट” है, यानी इसमें इंसानों को साथ लेकर तकनीक की जांच की जा रही है। इसका लक्ष्य यह साबित करना है कि नासा के नए रॉकेट और सिस्टम भविष्य में चंद्रमा और मंगल जैसे दूरस्थ मिशनों के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। हालांकि इस मिशन में कई बार देरी भी हुई। इसे मूल रूप से फरवरी में लॉन्च किया जाना था, लेकिन तकनीकी कारणों से रॉकेट को जांच और मरम्मत के लिए वापस हैंगर में ले जाना पड़ा। इसके बाद नई लॉन्च विंडो तय की गई।

बार-बार हुई मिशन में देरी

बता दें कि आखिरी बार इंसानों ने चंद्रमा पर कदम अपोलो 17 के दौरान दिसंबर 1972 में रखा था। इसके बाद लंबे समय तक चंद्र मिशनों में ठहराव आ गया और NASA ने अपना ध्यान स्पेस शटल और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे कार्यक्रमों पर केंद्रित कर दिया।

अब आर्टेमिस कार्यक्रम के जरिए नासा फिर से चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की तैयारी कर रहा है। एजेंसी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में, संभवतः 2028 तक, इंसानों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारा जाए। इसके लिए स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियों के साथ भी सहयोग किया जा रहा है।

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