एक वक्त की रोटी के बदले जिस्म…पाकिस्तानी मौलवी ने खोली अपनी ही फौज की पोल, कहा- ISI के शह पर हो रहा गंदा खेल
Pakistan News: मुफ़्ती सईद खान के बड़े खुलासे ने पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। मौलवी ने स्वीकार किया कि कश्मीर में आतंकियों के पीछे ISI है और कैंपों में महिलाओं का शोषण हो रहा है।
- Written By: अक्षय साहू
मौलवी मुफ़्ती सईद खान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mufti Saeed Khan statement on Kashmiri Women: पाकिस्तान के एक प्रमुख मौलवी ने यह स्वीकार किया है कि कश्मीर में सक्रिय आतंकी समूहों के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका है। इस खुलासे करने वाले मौलवी का नाम मुफ़्ती सईद खान बताया जा रहा है, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी माना जाता है।
मौलवी ने यह भी दावा किया कि महिला शरणार्थियों को बुनियादी भोजन के बदले यौन शोषण का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, कुछ शरणार्थी कैंपों में कश्मीरी मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों को एक वक्त की रोटी के लिए अपने शरीर का सौदा करने पर मजबूर किया जाता था।
मुफ़्ती सईद के आरोपों पर सरकार की चुप्पी
इस कथित बयान ने इस्लामाबाद की प्रॉक्सी वॉर रणनीति पर सवाल और गहरे कर दिए हैं। साथ ही, इससे कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों को समर्थन देने में ISI की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं को बल मिला है। मौलवी ने ये बातें एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कही थीं। जानकारी के मुताबिक, मौलवी के इस बयान के चलते पाकिस्तान में सियासत तेज हो गई है। हालांकि अभी तक उनके आरोंपो पर पाकिस्तानी सेना या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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कौन हैं मुफ़्ती सईद खान?
मुफ़्ती सईद खान सुन्नी इस्लाम के देवबंदी विचारधारा से जुड़े एक पाकिस्तानी इस्लामिक विद्वान हैं। वे इस्लामाबाद स्थित अल-नदवाह एजुकेशनल ट्रस्ट के संस्थापक हैं। बताया जाता है कि उन्होंने 1995 में पाकिस्तान में तख्तापलट की एक कोशिश में भी भाग लिया था।
जनवरी 2023 में उन्हेंपाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की कोर कमेटी का सदस्य बताया गया था। इसके अलावा, उन्होंने बुशरा बीबी और इमरान खान के विवाह समारोह को भी संपन्न कराया था।
कमजोर महिलाओं को बनाते हैं निशाना
मौलवी के अनुसार, जिन्हें अक्सर ‘मुजाहिदीन’ या धार्मिक लड़ाके कहा जाता है, वे कई बार बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते हैं। अस्थिर परिस्थितियों का फायदा उठाकर उनका शोषण किया जाता है।
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रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि उनके ये बयान संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा और जबरदस्ती से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स की पुष्टि करते नजर आते हैं। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के आधिकारिक रुख को नुकसान पहुंच सकता है।
