Middle East में कोहराम: ईरान का बड़ा हमला, इजराइल की तेहरान में स्ट्राइक और बढ़ती महंगाई
Saudi Iran Military Escalation: मिडिल ईस्ट में जंग के 8वें दिन ईरान ने सऊदी पर हमला किया। कुवैत में 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए और दिल्ली में रसोई गैस 60 रुपये महंगी हुई। तनाव चरम पर है।
- Written By: प्रिया सिंह
मिडिल ईस्ट जंग में कोहराम (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global Impact Of Middle East War: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग अब एक भयावह मोड़ ले चुकी है जहां मासूम जिंदगियां और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों दांव पर लगी हैं। ईरान और इजराइल के बीच जारी इस खूनी संघर्ष का आज आठवां दिन तबाही की एक नई इबारत लिख रहा है। पश्चिमी तेहरान के आसमान में उठती लपटें और कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की शहादत इस बात का गवाह है कि हालात बेकाबू हो चुके हैं। इस भीषण युद्ध की तपिश अब भारतीय रसोई तक पहुंच गई है जहां गैस के दाम बढ़ने शुरू हो गए हैं।
तेहरान में तबाही और इजराइल का भीषण प्रहार
इजराइली फाइटर जेट्स ने शुक्रवार की रात ईरान की राजधानी तेहरान में जबरदस्त बमबारी की जिससे पूरा शहर दहल उठा और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। इस गुप्त सैन्य ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के उस भूमिगत बंकर को नष्ट करना था जो सुरक्षा के लिहाज से बनाया गया था। आसमान में छाए धुएं के गुबार और धमाकों की गूंज ने स्थानीय निवासियों के मन में गहरी दहशत पैदा कर दी है जिससे शांति की उम्मीदें धुंधली हो गई हैं।
अमेरिकी सैनिकों की मौत और बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दखल
कुवैत के पोर्ट शुआइबा में हुए घातक ड्रोन हमले ने अमेरिका को गहरा जख्म दिया है जिसमें 6 बहादुर सैनिकों की जान चली गई और 18 अन्य घायल हुए हैं। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार रूस अब परोक्ष रूप से इस युद्ध में शामिल हो गया है और वह ईरान को अमेरिकी गतिविधियों की गुप्त जानकारी प्रदान कर रहा है। यह बढ़ता गठबंधन और सैन्य टकराव इस क्षेत्रीय विवाद को एक भयावह अंतरराष्ट्रीय युद्ध में बदलने की पूरी क्षमता रखता है जिससे दुनिया डरी हुई है।
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आम आदमी पर महंगाई और बढ़ती कीमतों की दोहरी मार
मिडिल ईस्ट के इस भारी तनाव का सीधा असर अब दिल्ली की सड़कों और मध्यमवर्गीय परिवारों के घरों में साफ तौर पर महसूस किया जाने लगा है। सरकार की ओर से जारी संकेतों के बीच दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए गए हैं जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं रुका तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
अर्थव्यवस्था की तबाही और अरबों डॉलर का सैन्य खर्च
एक ताजा सैन्य रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के साथ चल रहे इस भीषण युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में ही अमेरिका के 3.7 अरब डॉलर स्वाहा हो चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा है कि बिना शर्त आत्मसमर्पण के अलावा ईरान के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता अब मुमकिन नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए दुनिया को आगाह किया है कि यह संकट कभी भी पूरी तरह नियंत्रण से बाहर जा सकता है।
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मानवीय संकट और वैश्विक शांति के लिए गहराता खतरा
कतर के ऊर्जा मंत्री ने साफ कर दिया है कि अगर युद्ध का सिलसिला जारी रहा तो दुनिया को ऊर्जा आपूर्ति के बड़े संकट और आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ेगा। यह जंग अब केवल सीमाओं की लड़ाई नहीं रह गई है बल्कि यह लाखों निर्दोष लोगों के जीवन और उनके सुखद भविष्य के लिए एक बड़ा सवाल बन चुकी है। फिलहाल कूटनीतिक रास्ते बंद नजर आ रहे हैं और लोग बस इस उम्मीद में हैं कि बमों की यह गूंज जल्द ही थम जाएगी।
