घिर गया इजरायल! बस एक चिंगारी और सब… अरब देशों ने बनाया खतरनाक प्लान
Middle East tension: इजरायल द्वारा कतर पर किए गए हमलों ने अरब दुनिया में हलचल मचा दी है। इस घटना के बाद अरब देशों में एकजुटता बढ़ रही है और वे एक साझा सैन्य गठबंधन बनाने पर विचार कर रहे हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
नेतन्याहू, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Arab Israel Relations: इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष का असर लगातार फैलता जा रहा है। शुरुआत गाजा से हुई, फिर लेबनान, वेस्ट बैंक, सीरिया, यमन और ईरान तक पहुंच गई। इजरायल ने इन सभी जगहों पर हमले किए, लेकिन इन हमलों का कोई खास असर नहीं हुआ। हालांकि, जैसे ही कतर की राजधानी दोहा में इजरायली हमले हुए, अरब क्षेत्र का पूरा राजनीतिक और रणनीतिक संतुलन बदल गया और इजराइल दबाव में आ गया।
इजरायल की युद्ध की तैयारियों का ध्यान पहले गाज़ा, लेबनान, वेस्ट बैंक, ईरान और यमन पर केंद्रित था। लेकिन अचानक इजरायल ने क़तर के खिलाफ हमला करके अरबों के रणनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदल दिया। इजरायल का दावा है कि दोहा में किए गए इस हमले का लक्ष्य हमास के नेता थे, लेकिन नेतन्याहू ने इसी हमले के जरिए अरब दुनिया में एक नए संघर्ष की शुरुआत कर दी।
दुनिया में एक नए संघर्ष की शुरुआत
इजरायल की युद्ध की तैयारियों का ध्यान पहले गाज़ा, लेबनान, वेस्ट बैंक, ईरान और यमन पर केंद्रित था। लेकिन अचानक इजरायल ने क़तर के खिलाफ हमला करके अरबों के रणनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदल दिया। इजरायल का दावा है कि दोहा में किए गए इस हमले का लक्ष्य हमास के नेता थे, लेकिन नेतन्याहू ने इसी हमले के जरिए अरब दुनिया में एक नए संघर्ष की शुरुआत कर दी।
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नेतन्याहू ने हाल ही में एक पोस्ट के जरिए कतर पर हमले और गाजा संकट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि हमास के नेता कतर में मौजूद हैं और उन्हें गाजा के लोगों की कोई चिंता नहीं है। नेतन्याहू का कहना है कि वे युद्ध को अनिश्चितकाल तक खींचने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने युद्धविराम के प्रयासों को भी रोका। उनके अनुसार, हमास से छुटकारा पाने से सभी बंधकों की रिहाई संभव होगी और शांति की राह में मुख्य बाधा दूर होगी। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि नेतन्याहू कतर पर हुए हमले को सही ठहराते हैं और भविष्य में भी कतर में हमास के ठिकानों पर हमले करने से पीछे नहीं हटेंगे।
इजरायल के खिलाफ अरब देश
असल में यह पोस्ट केवल बयान नहीं, बल्कि एक तरह की चेतावनी है। लेकिन यदि एक और हमला किया गया, तो परिस्थितियों का असर क्या होगा, इसे अभी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। नेतन्याहू के इरादों को ध्यान में रखते हुए, दोनों तरफ से तैयारी शुरू हो गई है। पहला मोर्चा कूटनीतिक है, जिसमें अमेरिका इजरायल के समर्थन में खड़ा है, और दूसरा मोर्चा रणनीतिक है, जिसमें अरब देशों का पूरा समूह इजरायल के खिलाफ है। कतर मामले में कूटनीतिक मोर्चा अमेरिका ने पहले ही खोल दिया है।
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ट्रंप ने कतर पर हुए हमले को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इसके बाद उनके प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ इजरायल पहुंच चुके हैं और उन्होंने ट्रंप की नाराजगी की जानकारी इजरायल को दे दी है। यह कदम एक दिन पहले न्यूयॉर्क में कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी से हुई ट्रंक मुलाकात के बाद उठाया गया। इस बैठक में कतर ने इजरायल के हमले पर नाराजगी जताई थी। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि संभावित हमले को लेकर सैन्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसका मतलब है कि कतर और इजरायल के बीच टकराव से ट्रंप के लिए संकट पैदा हो सकता है, इसलिए उन्होंने तुरंत कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
