इन 9 देशों पर मंडरा रहा है तबाही का साया! अमेरिका के चक्कर में धधक उठेगा मिडिल-ईस्ट
ट्रंप सरकार ने मध्य पूर्व में स्थित अपने सभी सैन्य अड्डों को हाई अलर्ट पर कर दिया है। इनमें इराक स्थित अमेरिकी बेस की सुरक्षा सबसे ज्यादा बढ़ाई गई है, क्योंकि यह ईरान के सबसे नजदीक है। अमेरिका ने पहले ही यहां से अपने..
- Written By: अमन उपाध्याय
धधकने लगा मिडिल-ईस्ट, (डिजाइन फोटो)
नई दिल्ली: ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमले के बाद मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे अलर्ट पर हैं। अमेरिका के इस क्षेत्र के लगभग सभी देशों में सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जिनमें से 9 ईरान के नजदीक स्थित हैं। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर अमेरिका उस पर हमला करता है, तो वह मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाएगा। अब जब अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है, तो संभावना है कि ईरान के जवाबी हमले में इस क्षेत्र के ये 9 देश भी प्रभावित हो सकते हैं।
वर्तमान में मध्य पूर्व में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो देश के बाहर मौजूद कुल अमेरिकी सैन्य बल का लगभग एक-तिहाई है। इराक, बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सीरिया, जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे ईरानी मिसाइलों की पहुंच में हैं और उनके निशाने पर हो सकते हैं।
#US MILITARY PRESENCE IN THE MIDDLE EAST ❗️Around 50,000 US troops are currently stationed in the #MidEast, making up nearly a third of ALL US forces deployed outside the country. 🇰🇼🇶🇦🇧🇭 The majority are based in #Kuwait, #Qatar, and #Bahrain. pic.twitter.com/iMOMUNkxZ1 — Emeka Gift Official (@EmekaGift100) June 21, 2025
सम्बंधित ख़बरें
बाबरी बना जैन मंदिर, कृष्ण नगर के नाम से जाना जाएगा इस्लामपुरा, जानें क्यों सड़कों से मुस्लिम नाम हटा रहा पाक
लाइव टीवी पर AK-47 चलाने की ट्रेनिंग…ट्रंप की धमकी से ईरान में मचा हड़कंप, आम जनता ने उठाए हथियार- VIDOE
100 बिलियन डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियां! नॉर्वे और भारत के बीच हुई बड़ी डील, आतंकवाद पर भी गरजे PM मोदी
43 साल का इंतजार खत्म! ओस्लो पहुंचे PM मोदी, वैश्विक मंदी और युद्ध के बीच नॉर्वे से होने जा रही है ‘महाडील’
सभी सैन्य अड्डे हाई अलर्ट पर
ट्रंप सरकार ने मध्य पूर्व के सभी सैन्य अड्डों को हाई अलर्ट पर रखा है, जिसमें इराक स्थित अमेरिकी बेस को सबसे अधिक सुरक्षा प्रदान की गई है। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि यह बेस ईरान के सबसे नजदीक स्थित है। अमेरिका ने पहले ही यहां से अपने अधिकांश सैनिकों को वापस बुला लिया है और अब इराक में केवल कुछ ही अमेरिकी अधिकारी मौजूद हैं। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा के लिए इराकी सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इराकी सरकार को ईरान द्वारा किसी संभावित हमले की आशंका सता रही है।
मध्य पूर्व के अन्य देशों में भी इसी तरह की चिंता देखी जा रही है। अगर ईरान, इजराइल के साथ-साथ इन देशों को भी निशाना बनाता है, तो इससे भारी विनाश हो सकता है और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में युद्ध की आग फैल सकती है।
‘पार की सारी सीमाएं…’मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस पर अब बरसेगा कहर? ईरान की चेतावनी से मचा हड़कंप
कोई भी अन्य सेना ऐसा नहीं कर सकती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों के बाद एक बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों फोर्डो, नतांज़ और एस्फ़हान पर सफलतापूर्वक हमला किया है। उन्होंने बताया कि सभी अमेरिकी विमान अब ईरानी हवाई क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। ट्रंप ने विशेष रूप से फोर्डो स्थल का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहां पूरी मात्रा में बम गिराए गए। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा, “हमारे महान योद्धाओं को बधाई। दुनिया में कोई भी अन्य सेना ऐसा नहीं कर सकती थी।”
अमेरिका ने ईरान पर जबरदस्ती युद्ध थोपा
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला करके अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर जबरदस्ती युद्ध थोपा है और ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई का पूरा हक है। विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि ईरान इसका जवाब देगा और पलटवार करेगा।
