Israel-Lebanon Ceasefire: ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव और सीजफायर वार्ताओं के बीच लेबनान में संघर्षविराम का मुद्दा भी अहम राजनीतिक विवाद बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच हालिया जंगबंदी के बाद भी लेबनान में जारी हमलों को लेकर स्थिति काफी तनावपूर्ण रही, जिससे शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए थे।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को लेबनान में 10 दिनों के सीजफायर की घोषणा की। हालांकि इस घोषणा के बावजूद क्षेत्र में भरोसे और स्थायित्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि पहले भी कई बार संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सऊदी अरब की भूमिका को भी काफी अहम माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने ट्रंप से फोन पर बातचीत कर लेबनान में तत्काल सीजफायर की आवश्यकता पर जोर दिया। बताया जा रहा है कि इस बातचीत के बाद ही ट्रंप ने संघर्षविराम की घोषणा की। सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका पर दबाव डाला कि वह इजरायल को लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए राजी करे, ताकि ईरान के साथ चल रही व्यापक वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके। सऊदी पक्ष का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए लेबनान में युद्धविराम बेहद जरूरी है, खासकर तब जब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों को फिर से खोलने की कोशिशें चल रही हैं।
पश्चिमी और अरब अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सऊदी अरब इस पूरे कूटनीतिक प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और वह चाहता है कि ईरान-अमेरिका वार्ता किसी निर्णायक नतीजे तक पहुंचे। सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान और रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान के जल्द ही अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की संभावना भी जताई जा रही है।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत जल्द ही इस्लामाबाद में फिर शुरू हो सकती है। उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की भी सराहना की है और यहां तक कहा है कि अमेरिका इस कूटनीतिक प्रक्रिया में उसकी भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।