बांग्लादेश में बिस्वा इज्तेमा का 58वां आयोजन, भारत के ये मौलाना भी लेंगे हिस्सा
Ijtema in Bangladesh : पिछले साल दिसंबर में इज्तेमे ग्राउंड के अधिकार को लेकर विवाद छिड़ गया था, जिसमें भारतीय मौलाना साद और बांग्लादेश के मौलाना जुबैर अहमद के समर्थकों के बीच झड़प हो गई।
- Written By: अमन उपाध्याय
बांग्लादेश में बिस्वा इज्तेमा 58वां आयोजन, फोटो ( सो.सोशल मीडिया )
नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: बांग्लादेश में फैली अशांति के बीच मुसलमानों के सबसे बड़े इज्तेमों (इस्लामिक सम्मेलन) में से एक बिस्वा इज्तेमा का पहला चरण कल शुक्रवार को तुराग नदी के तट पर शुरू होने जा रहा है. इस इज्तेमे में भारत के जाने-माने मौलाना साद कांधलवी भी शिरकत करेंगे।
बता दें कि पिछले साल दिसंबर में इज्तेमे ग्राउंड के नियंत्रण को लेकर भारतीय मौलाना साद और बांग्लादेशी मौलाना जुबैर अहमद के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस संघर्ष में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई थी और करीब पचास लोग घायल हो गए थे।
अब दो चरणों में होगा आयोजन
अब विवाद को सुलझाने के लिए दोनों गुटों के बीच सहमति बनी है, जिसके तहत इज्तेमे का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण 31 जनवरी से 5 फरवरी तक चलेगा, जिसमें मौलाना जुबैर अहमद के अनुयायी भाग लेंगे। वहीं, दूसरा चरण 14 से 16 फरवरी तक होगा, जिसमें भारतीय मौलाना साद के समर्थक शामिल होंगे।
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बिस्वा इज्तेमे में पहली बार होंगी दो मुनाजात
बांग्लादेश में इस बार बिस्वा इज्तेमे में पहली बार दो मुनाजात (प्रार्थनाएं) आयोजित की जाएंगी। दरअसल, तब्लीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद और तब्लीगी जमात (जुबैर गुट) के नेता मौलाना जुबैर अहमद के समर्थकों की बड़ी संख्या होने के कारण यह फैसला लिया गया है। दिसंबर में दोनों गुटों के बीच इज्तेमे के मैदान को लेकर विवाद हुआ था, जिससे झड़प की नौबत आ गई थी। इस टकराव के बाद, समाधान के तौर पर बिस्वा इज्तेमे को दो चरणों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया।
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58वें विश्व इज्तेमा के लिए सख्त कानून व्यवस्था
58वें विश्व इज्तेमा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस महानिरीक्षक बहारुल आलम ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि यह आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
मौलाना साद की बांग्लादेश यात्रा
मौलाना साद का बांग्लादेश में गहरा प्रभाव माना जाता है। उनकी यात्रा के दौरान वहां के बड़े सरकारी अधिकारियों और नेताओं से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। इस दौरे को भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ी दूरी को कम करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
