अमेरिकी सीनेटर मार्क वार्नर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Strained Indo-US Diplomatic Relations: भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों में हाल के दिनों में काफी खिंचाव देखने को मिला है। अमेरिकी सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन मार्क वार्नर ने भारत-अमेरिका के बीच तनावपूर्ण राजनयिक संबंध पर गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच उपजे इस तनाव का असर द्विपक्षीय सुरक्षा फ्रेमवर्क पर बहुत बुरा पड़ रहा है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में क्वाड गठबंधन का कमजोर होना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
अमेरिकी सीनेटर मार्क वार्नर ने आगाह किया है कि क्वाड और टू-प्लस-टू डायलॉग जैसे अहम सुरक्षा तंत्र की रफ्तार अब काफी धीमी हो रही है। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक कूटनीतिक रास्तों के लिए निरंतर राजनीतिक ध्यान और ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसे वर्तमान में नजरअंदाज किया जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से इन महत्वपूर्ण सुरक्षा मैकेनिज्म पर सरकार का फोकस काफी कम हो गया है जो चिंताजनक है।
मार्क वार्नर का मानना है कि ये संवाद केवल औपचारिक बैठकें नहीं हैं बल्कि देशों के बीच आपसी भरोसा बनाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन स्थापित तंत्रों को अनदेखा किया गया तो सहयोगी देशों के बीच अमेरिका की विश्वसनीयता पर बहुत गहरा असर पड़ सकता है। अगर अमेरिका के साथी देश यह सोचने लगें कि चीन एक अधिक भरोसेमंद पार्टनर है तो यह वॉशिंगटन के लिए भविष्य में एक बड़ी चुनौती होगी।
सीनेटर ने विशेष रूप से भारत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर भारतीय अधिकारी अमेरिका पर निर्भरता कम करने की बात करते हैं तो यह गंभीर है। जब अमेरिका अपने करीबी दोस्तों और साझेदारों की बेइज्जती करता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी भरोसे और सहयोग में भारी कमी आती है। रिश्तों में आई यह कड़वाहट केवल भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह अमेरिका के अन्य कई वैश्विक सहयोगियों के बीच भी देखी जा रही है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए क्वाड समूह को सुरक्षा और सप्लाई चेन के लिए एक केंद्रीय मंच माना जाता है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद स्थापित फ्रेमवर्क के जरिए निरंतर बातचीत बनाए रखना क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है। वार्नर का कहना है कि सैन्य संबंधों को मजबूत करना बहुत जरूरी है क्योंकि यह पूरे क्षेत्र में पावर डायनामिक्स को संतुलित करने में मदद करता है।
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भारत के नजरिए से क्वाड और टू-प्लस-टू डायलॉग का सक्रिय रहना रक्षा सहयोग को गहरा करने और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है। ये संवाद भारत को क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संतुलन बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत वैश्विक स्थिति को बनाए रखने में काफी मदद प्रदान करते हैं। इन मंचों के माध्यम से ही भारत और अमेरिका जैसे देश इंडो-पैसिफिक में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक साझा और बड़े विजन पर काम कर पाते हैं।
Ans: अमेरिकी सीनेटर के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव और राजनीतिक फोकस की कमी इस मंदी का मुख्य कारण है।
Ans: उन्होंने चेतावनी दी है कि कूटनीतिक तंत्र की अनदेखी से सहयोगियों के बीच अमेरिका के प्रति भरोसे में भारी कमी आ सकती है।
Ans: हां, वार्नर ने चिंता जताई है कि अमेरिकी साथी यह सोचने लगे हैं कि चीन अमेरिका की तुलना में अधिक भरोसेमंद पार्टनर हो सकता है।
Ans: ये वार्ताएं भारत के लिए रक्षा सहयोग को गहरा करने, क्षेत्रीय संतुलन बनाने और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
Ans: नहीं, वार्नर के अनुसार अमेरिका द्वारा अपने साथियों की अनदेखी करने से कई अन्य साझेदार देशों के साथ भी भरोसे की कमी आई है।