

Marco Rubio in ASEAN: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशन्स (ASEAN) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, चीन के विदेश मंत्री वांग यी समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। बैठक में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, साउथ चाइना सी विवाद और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि अमेरिका एक साथ कई वैश्विक संकटों का सामना कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद एशिया-प्रशांत क्षेत्र उसकी विदेश नीति का अहम केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अक्सर यह सवाल उठता है कि अमेरिका किसी एक संकट में इतना उलझ जाता है कि दूसरे क्षेत्रों पर ध्यान नहीं दे पाता, लेकिन वास्तविकता यह है कि अमेरिका हर दिन एशिया में अपने सहयोगियों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान अपनी आक्रामक गतिविधियां जारी रखता है तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा ईरान बातचीत की इच्छा जरूर जता रहा है, लेकिन अब तक उसने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है जिससे भरोसेमंद समझौते की उम्मीद की जा सके।
रुबियो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख स्पष्ट है और ईरान की हर उकसावे वाली कार्रवाई का पहले से अधिक कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरानस्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी जहाज को निशाना बनाता है, तो अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई करेगा। वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के ‘आंख के बदले आंख’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रुबियो ने कहा कि ट्रंप की नीति ‘आंख के बदले सिर’ जैसी है।
रुबियो ने बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका रूस और यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस संघर्ष का समाधान आसान नहीं है और ऐसा समझौता तैयार करना बड़ी चुनौती है जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।
रुबियो ने कहा कि पहले भी अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत की कोशिशें हुई थीं, लेकिन फिलहाल वे आगे नहीं बढ़ सकीं। इसके बावजूद वाशिंगटन कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा और यदि दोनों पक्ष तैयार होते हैं तो अमेरिका शांति वार्ता में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहेगा।