

Marco Rubio Threats ICC: संयुक्त राज्य अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के बीच का तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बेहद आक्रामक बयान जारी करते हुए ICC को पूरी तरह से समाप्त करने की खुली चेतावनी दी है।
ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब इस वैश्विक अदालत के अस्तित्व को स्वीकार करने के मूड में नहीं है और इसके लिए वह दुनिया भर के देशों से समर्थन जुटा रहा है। रुबियो का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने संबोधन और 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' में लिखे एक लेख में ICC के खिलाफ तीखे हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की हर एक ईंट उखाड़ फेंकेगा।
रुबियो का आरोप है कि ICC अंतरराष्ट्रीय कानून की आड़ में अमेरिका के खिलाफ एक तरह का छद्म युद्ध लड़ रहा है। उनके अनुसार, यह अदालत गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि न्यायिक सक्रियता के माध्यम से अमेरिका और उसके सहयोगियों की संप्रभुता को निशाना बना रही है।
अमेरिका और ICC के बीच यह टकराव नया नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें काफी पुरानी हैं। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान यह विवाद तब गहराया था जब ICC ने अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सैनिकों द्वारा किए गए कथित युद्ध अपराधों की जांच शुरू करने का प्रयास किया था। तभी से अमेरिका इस संस्था का कट्टर विरोधी रहा है।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही अमेरिका ने उन ICC अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं जो इजरायल और अमेरिका से जुड़े संवेदनशील मामलों की जांच करने की कोशिश कर रहे थे। अमेरिका का मानना है कि यह अदालत अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रही है।
ट्रंप प्रशासन ने अब ICC को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारी दुनिया भर की सरकारों से संपर्क कर रहे हैं ताकि उन्हें ICC का साथ छोड़ने के लिए राजी किया जा सके। इस अभियान में उन देशों पर विशेष दबाव बनाया जा रहा है जो ICC के सदस्य हैं।
अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह इस संस्था को कमजोर करने के लिए वीजा रद्द करने, यात्रा पर रोक लगाने और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों जैसे साधनों का इस्तेमाल करेगा। रुबियो ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपने पास मौजूद हर साधन का उपयोग करेगा।
अमेरिका ने उन देशों को भी कड़ी चेतावनी दी है जो एक तरफ तो अमेरिका से आर्थिक या सैन्य मदद लेते हैं और दूसरी तरफ ICC का समर्थन जारी रखते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि ऐसे देशों को भविष्य में अमेरिकी जांच और कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका चाहता है कि दुनिया के देश न केवल ICC का साथ छोड़ें, बल्कि उसे दी जाने वाली आर्थिक सहायता को भी तुरंत रोक दें। रुबियो का तर्क है कि ICC पर कुछ वामपंथी एनजीओ (NGO) और वैश्विक समूहों का प्रभाव है, जो विकासशील देशों के साथ मिलकर अमेरिका विरोधी एजेंडा चलाते हैं।