‘अमेरिका अब भरोसेमंद नहीं’! फ्रांस ने रूबियो के सामने जताई नाराजगी, G7 देशों ने ईरान जंग पर सुनाई खरी-खरी
Marco Rubio G7 Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा NATO देशों के अपमान के बाद विदेश मंत्री मार्को रूबियो G7 देशों को ईरान युद्ध में साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
मार्को रूबियो G7 बैठक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Marco Rubio Iran War Strategy: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति में एक बड़ी दरार सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शुक्रवार को फ्रांस के वॉक्स-डी-सर्ने में G7 के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO सहयोगियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ईरान युद्ध में मदद न करने के लिए अपमानित किया है।
NATO पर ट्रंप का गुस्सा
राष्ट्रपति ट्रंप ने NATO देशों के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ये देश रूस से अपनी रक्षा के लिए तो अमेरिका पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जब ईरान और इजरायल की मदद करने की बारी आई तो वे पीछे हट गए। ट्रंप ने विशेष रूप से इस बात पर रोष जताया कि NATO देश Strait of Hormuz को सुरक्षित करने में अमेरिका की मदद नहीं कर रहे हैं जिसके कारण वैश्विक तेल की आपूर्ति बाधित हो रही है और कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम NATO से बहुत निराश हैं क्योंकि उन्होंने बिल्कुल कुछ नहीं किया”।
रूबियो की चुनौती
रूबियो के सामने अब ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान जैसे G7 देशों को अमेरिका की ईरान नीति पर राजी करने की एक बड़ी चुनौती है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग सभी सहयोगी देश इस युद्ध को लेकर संशय में हैं और अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। रूबियो ने फ्रांस रवाना होने से पहले कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि वे वहां किसी को खुश करने के लिए नहीं जा रहे हैं बल्कि वे केवल अमेरिकी जनता के लिए काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को अमेरिकी राष्ट्रपति का शुक्रिया अदा करना चाहिए जो ईरान जैसे खतरे का सामना करने के लिए तैयार हैं।
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अमेरिका अब पहले जैसा नहीं रहा
बैठक में अमेरिका और उसके पुराने सहयोगियों के बीच का तनाव साफ नजर आया। फ्रांस के रक्षा प्रमुख जनरल फैबियन मैंडन ने कहा कि अमेरिका ने उन्हें युद्ध शुरू करने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी और अब वह एक ‘अनुमान लगाने लायक सहयोगी’ नहीं रह गया है। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने चिंता जताई कि इस संघर्ष के कारण यूक्रेन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन कम नहीं होना चाहिए। वहीं, ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने कूटनीति पर जोर देते हुए कहा कि ईरान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक नहीं बना सकता।
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धमकियों के खिलाफ एकजुटता की अपील
मार्को रूबियो ने G7 मंत्रियों से कहा कि जो देश अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हैं उन्हें ईरान द्वारा समुद्री जहाजों को दी जा रही धमकियों के खिलाफ मजबूती से आगे आना चाहिए। हालांकि बैठक के दौरान रूबियो ने अन्य मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाई लेकिन किसी भी अन्य देश ने फिलहाल अमेरिका के पक्ष में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है जिससे साफ है कि ईरान पर अमेरिकी रणनीति को लेकर पश्चिमी देशों में गहरी असहमति बनी हुई है।
