खैबर में उबल रहा माहौल! आसिम मुनीर के पोस्टर पर मचा बवाल, PTI बोली- ‘सेना राजनीति में क्यों कूद रही’
Pakistan Army Politics: भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने पर देश की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। पीटीआई और सरकार के बीच तनातनी काफी बढ़ गई है।
- Written By: अमन उपाध्याय
आसिम मुनीर के पोस्टर पर मचा बवाल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan News Hindi: पाकिस्तान में सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने और उन्हें संवैधानिक संशोधन के तहत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का अधिकार मिलने के बाद देश की राजनीति में नया भूचाल आ गया है।
जानकार मानते हैं कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मिली सैन्य पराजय को छिपाने और जनता के बीच सेना की साख बरकरार रखने के लिए यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया। हालांकि विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) इसे राजनीतिक स्टंट बताते हुए सेना और सरकार दोनों पर सवाल उठा रहा है।
खैबर विधानसभा में बढ़ा तनाव
गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा में तब तनाव फैल गया जब पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की विधायक सोबिया शाहिद ने आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए। स्पीकर सुरैया बीबी ने इस कदम को सदन की कार्यवाही से असंबंधित बताते हुए मार्शलों को पोस्टर हटाने का आदेश दिया।
सम्बंधित ख़बरें
बलूच लोग 11 अगस्त को ही क्यों मनाएंगे Balochistan Independence Day? जानें पूरा इतिहास
बिलावल भुट्टो ने शहबाज को दी बड़ी चेतावनी, कहा कि आपका काउंटडाउन अब हो चुका है शुरू
भागने से काम नहीं चलेगा! पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को प्रत्यर्पित कराने के लिए बांग्लादेश का सख्त बयान
‘इस्तीफे का पैंतरा अब नहीं चलेगा!’ सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei की राष्ट्रपति मसूद को चेतावनी
स्पीकर ने कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पूरी सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है। उन्होंने विधायक को सलाह दी कि वे अपनी पार्टी की परफॉर्मेंस और जनहित के मुद्दों पर बात करें, न कि सेना प्रमुख की तस्वीरें लहराएं।
लगातार राजनीतिक बयानबाजी
इस घटना ने विपक्ष में और भी नाराजगी पैदा कर दी। पीटीआई के विधायकों ने आरोप लगाया कि देश आर्थिक संकट, गरीबी और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, लेकिन सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी लगातार राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। खासतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और खैबर पख्तूनख्वा के सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ बयान देने पर विपक्ष भड़क उठा है।
पीटीआई विधायक हुमायूं खान ने कहा कि सेना को राजनीतिक मामलों में दखल देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोग देश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की बात कर रहे हैं, जो खैबर पख्तूनख्वा जैसे संवेदनशील इलाके में संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यहां की जनता किसी भी तरह की राजनीतिक इंजीनियरिंग को स्वीकार नहीं करेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी आलोचना
विपक्ष का आरोप है कि सेना सरकार के साथ मिलकर राजनीतिक नैरेटिव नियंत्रित कर रही है ताकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी आलोचना को दबाया जा सके। दूसरी ओर, सरकार और पीएमएल-एन नेताओं का कहना है कि सेना को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए फैसले लेना जरूरी है।
यह भी पढ़ें:- इमरान के करीबी रहे पूर्व ISI प्रमुख को 14 साल की जेल, पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट का बड़ा फैसला
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि पाकिस्तान में सेना और राजनीति के बीच खिंचाव फिर गहरा गया है, और आसिम मुनीर की पदोन्नति ने इसे और भड़का दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिरता के लिए बड़ा चुनौती बन सकता है।
