
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Keir Starmer Kamasutra Statement: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर हाल ही में हाउस ऑफ कॉमन्स में एक विवादास्पद टिप्पणी के कारण राजनीतिक आलोचना का सामना कर रहे हैं। प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी नेता केमी बैडेनोच द्वारा सरकार की नीतिगत उलटफेरों पर सवाल उठाए जाने पर स्टार्मर ने मजाक में कहा कि “विपक्ष ने 14 वर्षों में कामसूत्र से भी अधिक पद बदले हैं।”
कीर स्टार्मर के इस टिप्पणी ने सदन में सन्नाटा और असहजता पैदा कर दी, जिसे आलोचकों ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा के लिए उपयुक्त न मानते हुए असंवेदनशील बताया। ब्रिटेन के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टार्मर की यह टिप्पणी उनके नेतृत्व की कमजोरियों और जनता की भावनाओं से दूरी को उजागर करती है। देश आर्थिक चुनौतियों और सार्वजनिक सेवाओं की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में प्रधानमंत्री का हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देना विपक्ष और जनता के लिए निराशाजनक प्रतीत हुआ।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब लेबर सरकार अपनी नीतियों, विशेषकर डिजिटल आईडी और आवास क्षेत्र के वादों की आलोचना का सामना कर रही है। जुलाई में सत्ता संभालने के बाद स्टार्मर ने सालाना तीन लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बढ़ती निर्माण लागत और श्रम की कमी जैसी चुनौतियों ने सरकार की राह कठिन बना दी है। इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि और नए “रोजगार कर” जैसे कदमों ने निर्माण कंपनियों और उद्योगों में असंतोष पैदा किया है।
Blimey. Did I really just hear Keir Starmer say this “They had more positions in 14 years than the Kama Sutra. No wonder they are knackered and they left the country screwed”#PMQs pic.twitter.com/h12ePONGk2 — Peter Stefanovic (@PeterStefanovi2) January 14, 2026
हाउस ऑफ कॉमन्स में इस वाकयुद्ध ने स्पष्ट कर दिया है कि कीर स्टार्मर सरकार अपनी विश्वसनीयता साबित करने के लिए दबाव में है। नीतिगत असफलताओं और विवादास्पद बयानों के बीच जनता में सरकार की कार्यक्षमता को लेकर शंका बढ़ रही है। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लोग स्टार्मर के बयान की तीखी आलोचना कर रहे हैं।
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लेबर पार्टी के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी नेतृत्व शैली को देश की वास्तविक अपेक्षाओं के अनुरूप ढालना और वादों को जमीन पर लागू करना बन गई है। इस घटना ने यह भी संकेत दिया है कि किसी भी हल्के-फुल्के कटाक्ष का राजनीतिक महत्त्व केवल हास्य तक सीमित नहीं रहता; यह नेतृत्व की गंभीरता और जनता की धारणा पर सीधे असर डालता है।






