PM ताकाइची, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Japan Minesweeping Hormuz Strait: मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के बीच जापान ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सैन्य रुख अपनाया है। जापान सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम होता है, तो वह इस सामरिक समुद्री रास्ते से बारूदी सुरंगें हटाने के लिए अपनी ‘सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ (SDF) भेजने पर विचार कर सकता है। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने स्पष्ट किया कि यह कदम तभी उठाया जाएगा जब समुद्री रास्ता पूरी तरह बाधित हो और युद्ध रुक चुका हो।
यह घटनाक्रम जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के ठीक दो दिन बाद सामने आया है। बैठक के दौरान ट्रंप ने जापान से इस संकट में अधिक सहयोग मांगा था। जवाब में ताकाइची ने स्पष्ट किया कि जापान अपने संविधान और कानूनों के दायरे में रहकर ही मदद कर सकता है। जापान सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता, लेकिन शांति बहाली के बाद एक ‘सीमित भूमिका’ निभाने को तैयार है।
जापान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना उसके अस्तित्व के लिए आवश्यक है, क्योंकि जापान अपनी करीब 90% तेल की जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है। युद्ध के कारण ईरान द्वारा इस रास्ते को बाधित किए जाने से न केवल जापान बल्कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जापान को लुभाने की कोशिश करते हुए कहा था कि जापान से जुड़े जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है लेकिन जापान ने स्पष्ट किया है कि वह केवल अपने लिए नहीं बल्कि सभी देशों के लिए एक सुरक्षित रास्ता चाहता है।
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जापान के संविधान के अनुसार, उसकी सेना सीधे युद्ध में हिस्सा नहीं ले सकती। हालांकि, 2015 के सुरक्षा कानून के तहत जापान को यह छूट प्राप्त है कि यदि उसके किसी करीबी सहयोगी (जैसे अमेरिका) पर हमला होता है और उससे जापान की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है, तो वह अपनी सेना विदेश भेज सकता है। माइंस हटाने का ऑपरेशन इसी कानूनी दायरे के तहत देखा जा रहा है।