Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

Bangladesh Elections: जमात-ए-इस्लामी की हार, ऐतिहासिक गलतियों और कट्टरता का पड़ा भारी असर

Historical Legitimacy Crisis: 13वें संसदीय चुनाव में दूसरी बड़ी ताकत बनने के बावजूद जमात-ए-इस्लामी सत्ता से दूर रही। इसके पीछे विवादित इतिहास, पाकिस्तान का साथ देना और वैचारिक कट्टरता प्रमुख कारण हैं।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Feb 15, 2026 | 07:12 AM

बांग्लादेश चुनाव जमात-ए-इस्लामी (सोर्स-सोशल मीडिया)

Follow Us
Close
Follow Us:

Challenges Facing Jamaat-e-Islami: हाल के चुनावों में जमात-ए-इस्लामी एक महत्वपूर्ण संख्यात्मक शक्ति के रूप में तो उभरी है, लेकिन वह अपनी इस जीत को वास्तविक राजनीतिक सफलता में बदलने में पूरी तरह विफल रही है। इसके मूल में पार्टी का वह विवादित इतिहास है जिसने बंगाली समाज में उसके प्रति गहरे अविश्वास और संदेह की स्थिति पैदा कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पार्टी अपनी पुरानी विचारधारा और अतीत की गलतियों में सुधार नहीं करती, तब तक उसके लिए लोकतांत्रिक स्वीकार्यता पाना कठिन होगा।

चुनावी परिणाम और विफलता का सच

13वें संसदीय चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरने के बावजूद जमात-ए-इस्लामी अपनी संख्यात्मक ताकत को सार्थक सफलता में नहीं बदल सकी। IBT की रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोधाभास पार्टी के पुराने ऐतिहासिक फैसलों, वैचारिक कठोरता और दक्षिण एशियाई इतिहास के दर्दनाक अध्यायों से जुड़ा है। जमात-ए-इस्लामी की वैधता का यह गहरा संकट उसके गठन और पुराने हिंसक राजनीतिक आचरण के कारण आज भी समाज में बना हुआ है।

हिंसा और उग्रवाद का काला इतिहास

पार्टी के संस्थापक मौलाना मौदूदी विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे, जहां उन्होंने अपना विशेष वैचारिक एजेंडा सशस्त्र संघर्ष से लागू करने का प्रयास किया। पाकिस्तान में जमात और उसकी छात्र शाखा का इतिहास हिंसा, बूथ कैप्चरिंग, विरोधियों के अपहरण और दिन-दहाड़े हत्या जैसी जघन्य घटनाओं से भरा रहा है। इन हिंसक गतिविधियों ने पार्टी की साख को लोकतांत्रिक समाज में पूरी तरह खत्म कर दिया है और आम जनता के मन में गहरा डर बिठाया है।

सम्बंधित ख़बरें

बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने लोगों से की शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील

‘हसीना का प्रत्यर्पण रिश्तों में नहीं बनेगा बाधा’, चुनाव के बाद BNP नेता का बड़ा बयान; जानें क्या है प्लान

भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते! चुनाव जीतने के बाद तारिक रहमान ने दिया बयान, क्या शेख ‘हसीना’ पर फंसेगा पेंच?

‘मेंढक का जहर’ देकर…’, पुतिन के सबसे बड़े विरोधी की मौत पर 5 देशों का बड़ा दावा, रूस की बढ़ेंगी मुश्किलें

1971 के मुक्ति संग्राम में भूमिका

जब पूर्वी पाकिस्तान के बंगाली मुसलमानों ने अन्याय के खिलाफ आंदोलन किया, तब जमात ने उनके साथ खड़े होने के बजाय पाकिस्तानी सेना का सक्रिय साथ दिया। उस दौरान पार्टी पर बंगाली मुसलमानों के खिलाफ नरसंहार और हिंसा में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे, जिससे उसकी छवि पर बहुत गहरा असर पड़ा। आज भी बंगाली समाज उस दौर की हिंसा और पार्टी की नकारात्मक भूमिका को भूल नहीं पाया है जो उसकी राजनीतिक स्वीकार्यता को रोकता है।

वैचारिक स्वीकार्यता और कट्टरवाद का असर

जमात-ए-इस्लामी जिस राजनीतिक विचारधारा और इस्लाम की कट्टर व्याख्या को बढ़ावा देती है, उसे दक्षिण एशिया की विविध सामाजिक संरचना में कभी स्वीकार्यता नहीं मिली है। पार्टी के लिए अपने व्यवहार में बुनियादी बदलाव किए बिना भविष्य में दीर्घकालिक राजनीतिक सफलता हासिल करना एक अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है। कट्टरपंथ की यह छवि पार्टी को लोकतांत्रिक मुख्यधारा से अलग-थलग कर देती है और उसे गठबंधन की राजनीति में भी हमेशा कमजोर बनाती है।

वैश्विक दृष्टिकोण और भविष्य की राह

वैश्विक समुदाय और स्थानीय बंगाली मुसलमान दोनों ही जमात-ए-इस्लामी के अतीत और उसकी विवादित भूमिका से आज भी पूरी तरह से भली-भांति परिचित हैं। यही कारण है कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता पर उनके पुराने कर्मों का गहरा असर पड़ता है और वे सत्ता के शीर्ष पदों तक नहीं पहुंच पाते। बिना अपनी विचारधारा बदले और अतीत की गलतियों को सुधारे पार्टी के लिए आधुनिक लोकतंत्र में टिकना लगभग नामुमकिन सा नजर आता है।

यह भी पढ़ें: भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते! चुनाव जीतने के बाद तारिक रहमान ने दिया बयान, क्या शेख ‘हसीना’ पर फंसेगा पेंच?

राजनीतिक अलगाव की वर्तमान स्थिति

वर्तमान चुनावी समीकरणों में पार्टी का अलग-थलग पड़ना उसके पुराने वैचारिक मतभेदों और समाज विरोधी गतिविधियों का एक सीधा और स्वाभाविक परिणाम माना जा रहा है। जब तक यह दल लोकतांत्रिक मूल्यों और बंगाली संस्कृति के साथ सामंजस्य नहीं बिठाता, तब तक जनता का विश्वास जीतना उसके लिए असंभव रहेगा। भविष्य की राजनीति में जमात की प्रासंगिकता अब पूरी तरह से उसके द्वारा किए जाने वाले आंतरिक सुधारों और व्यवहार परिवर्तन पर निर्भर करती है।

Jamaat e islami struggle for legitimacy in bangladesh 13th parliamentary elections

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Feb 15, 2026 | 07:12 AM

Topics:  

  • Bangladesh Election
  • World News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.