Israel US Tension: इजरायल को अब अमेरिका की खैरात की जरूरत नहीं, नेतन्याहू ने किया बड़ा ऐलान
Israel US Tension: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि अब उन्हें अमेरिकी आर्थिक मदद की कोई भी आवश्यकता नहीं है। इजरायल की अर्थव्यवस्था अब अपने दम पर बहुत मजबूत है।
- Written By: प्रिया सिंह
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-सोशल मीडिया)
Israel US Tension Update: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को लेकर एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कहा है कि इजरायल को अब अमेरिका से मिलने वाली किसी भी तरह की आर्थिक खैरात या कल्याणकारी मदद की कोई भी जरूरत नहीं है।
ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर जो कदम उठाए गए थे, अब उनके रिश्तों में भारी खटास आ गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नेतन्याहू ने देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर बहुत अधिक जोर देते हुए अमेरिका से मिलने वाली इस कल्याणकारी सब्सिडी को पूरी तरह खत्म करने की बात कही है। उनका यह बयान सुरक्षा और भू-राजनीतिक मोर्चों पर उनकी सरकार की व्यापक और नई रणनीति की एकदम स्पष्ट रूपरेखा को दर्शाता है।
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इजरायल की मौजूदा आर्थिक मजबूती का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बाहरी फंडिंग अब उनके लिए न के बराबर मायने रखती है। इजरायली सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी रक्षा और अर्थव्यवस्था को अब खुद ही बहुत अच्छे से संभाल सकते हैं।
अर्थव्यवस्था अब छोटी नहीं रही
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह स्पष्ट किया है कि इजरायल की अर्थव्यवस्था अब पहले की तरह बिल्कुल भी छोटी या किसी पर निर्भर नहीं रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक मदद इजरायल की कुल जीडीपी का एक बहुत ही छोटा सा हिस्सा है जिसके बिना वे आसानी से काम चला सकते हैं।
नेतन्याहू ने यह भी घोषणा की है कि अमेरिका से मिलने वाली इस आर्थिक मदद को पूरी तरह से बंद करने की प्रक्रिया इसी साल से शुरू की जाएगी। इस कदम को कूटनीतिक रूप से अमेरिका के दबाव को दरकिनार करते हुए एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मजबूत खड़े होने की कोशिश माना जा रहा है।
फिलिस्तीन के दर्जे का किया कड़ा विरोध
क्षेत्रीय और संप्रभुता से जुड़े अहम मुद्दों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने फिलिस्तीन को एक अलग देश का दर्जा देने का फिर से बहुत कड़ा विरोध किया है। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट रूप से दोहराते हुए कहा कि इजरायल हमेशा से ही यहूदी लोगों का देश है और यहां कोई फिलिस्तीनी देश बिल्कुल नहीं बनेगा।
उनका यह बयान अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उन तमाम कोशिशों को एक बहुत बड़ा झटका है जो शांति के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इजरायल अब किसी भी बाहरी दबाव में आकर अपनी राष्ट्रीय और कूटनीतिक नीतियों में कोई भी समझौता करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है।
सक्रिय सुरक्षा नीति पर भारी जोर
नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहुत आक्रामक रुख अपनाते हुए बताया कि इजरायली सेना बाहरी दुश्मनों के खिलाफ अब और ज्यादा सक्रिय रुख अपनाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हम एक सक्रिय सुरक्षा नीति अपनाएंगे और सिर्फ बाड़ के पीछे बैठकर किसी भी दुश्मन के हमले का इंतजार बिल्कुल नहीं करेंगे।
गाजा पट्टी में इजरायली बस्तियों को फिर से बसाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने एक सोची-समझी और बहुत ही कूटनीतिक चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझा। नेतन्याहू ने कहा कि बस्तियां बसाने की बात पर पहले कदम उठाने और बाद में बात करने के लिए देश को हमेशा तैयार रहना चाहिए।
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शासन की कला और नई कूटनीति
देश के भीतर शासन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर अपने नजरिए को स्पष्ट करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि कूटनीति में रणनीतिक अस्पष्टता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि शासन करने की कला का मतलब सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी बहुत मजबूत फैसले लेना है।
उन्हें हर समय अपनी हर बात और योजना पूरी दुनिया को बताने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती है, जिससे उनका रुख और ज्यादा आक्रामक नजर आता है। हाल के दिनों में शांति समझौते के कारण ट्रंप और नेतन्याहू के बीच गहरा तनाव पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर इस अहम फैसले में दिखा है।
