Electoral Reform: इटली में पीएम जॉर्जिया मेलोनी लाईं नया चुनावी फॉर्मूला, विपक्ष बता रहा तानाशाह
Electoral Reform Plan: इटली में राजनीतिक अस्थिरता खत्म करने के लिए पीएम मेलोनी नया चुनावी प्रस्ताव लेकर आई हैं। इस नए कानून के लागू होने पर विपक्षी दल इसे एक तानाशाह कदम बता रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Electoral Reform Italy News: इटली में अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले बहुत बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक ऐसा नया चुनावी फॉर्मूला लेकर आई हैं जिससे देश का पूरा चुनावी सिस्टम बदल जाएगा। प्रधानमंत्री इसे राजनीतिक स्थिरता के लिए जरूरी कदम बता रही हैं जबकि विपक्ष इसे पूरी तरह से तानाशाही रवैया कह रहा है।
मेलोनी का दावा है कि अगर यह नया प्रस्ताव लागू होता है तो इटली में हमेशा के लिए राजनीतिक स्थिरता आ जाएगी। इटली यूरोप के सबसे अस्थिर देशों में से एक है जहां पिछले पच्चीस साल में 10 प्रधानमंत्री हो चुके हैं। मेलोनी 11वीं प्रधानमंत्री हैं और यहां ज्यादातर नेता अपना पांच साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाते हैं।
चुनावी सिस्टम में नया बदलाव
इस नए सिस्टम में आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गई है जिसे मेजोरिटी प्राइज या बोनस का नाम दिया गया है। संसद में 17.5% अतिरिक्त बोनस सीटें हासिल करने के लिए गठबंधन को कम से कम 42% वोट हासिल करने होंगे। अगर कोई गठबंधन 42% वोट नहीं लाता है तो सीटों का बंटवारा वोट शेयर के हिसाब से ही किया जाएगा।
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मौजूदा चुनावी प्रणाली का हाल
इटली के निचले सदन चैंबर ऑफ डिप्टीज में 400 और ऊपरी सदन सीनेट में 200 सीटें निर्धारित की गई हैं। वर्तमान में इटली में 37% यानी कुल 147 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं और बाकी का बंटवारा वोट अनुपात पर होता है। साल 2022 के चुनाव में मेलोनी के गठबंधन को डायरेक्ट वोटिंग में 43.79% वोट मिले थे और उसने 121 सीटें जीती थीं।
मेलोनी गठबंधन को भारी फायदा
संविधान में बदलाव के बाद अगर यह प्रस्ताव पास होता है तो मेलोनी के गठबंधन को इसका जबरदस्त फायदा मिलेगा। नए नियम के तहत मेलोनी के दक्षिणपंथी गठबंधन को बोनस के साथ 400 में से 242 सीटें आसानी से मिल सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दलों के खाते में केवल 152 सीटें ही आने की उम्मीद जताई गई है।
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विपक्षी दल कर रहे कड़ा विरोध
विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता एली श्लेन ने इस नए चुनावी प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक कदम बताया है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह एक तानाशाही योजना है जिससे सारी शक्ति एक ही व्यक्ति के हाथ में आ जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार चुनाव से पहले इस तरह का प्रस्ताव लाना मेलोनी की बढ़ती हुई चिंता को दिखाता है।
