इजरायल का बड़ा एक्शन: गाजा सहायता बेड़े को समुद्र में रोका, दक्षिण कोरिया के एक्टिविस्ट को लिया हिरासत में
Gaza Aid Flotilla: इजरायली नौसेना ने गाजा जा रहे दक्षिण कोरियाई सहायता बेड़े 'काइरियाकोस एक्स' को बीच में रोक लिया है। दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ता को हिरासत में लेकर युद्धपोत पर रखा गया है।
- Written By: प्रिया सिंह
कोरियाई कार्यकर्ता की रिहाई की मांग करते लोग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Gaza Aid Flotilla Activists Intercepted: गाजा पट्टी की ओर जा रहे एक मानवीय सहायता बेड़े को इजरायली नौसेना ने बीच रास्ते में ही रोक लिया है। इस सहायता बेड़े पर सवार दक्षिण कोरिया के कार्यकर्ता किम डोंग-ह्योन को भी हिरासत में ले लिया गया है। यह बड़ी कार्रवाई सोमवार देर रात साइप्रस के पास इजरायली नौसेना द्वारा की गई है। कार्यकर्ता को अब अन्य देशों के लोगों के साथ इजरायली युद्धपोत पर पूरी सुरक्षा में रखा गया है।
यह नागरिक समूह फिलिस्तीन की आजादी का लगातार और बहुत मजबूती से समर्थन कर रहा है। किम इस महीने की शुरुआत में गाजा के लिए रवाना हुए थे जबकि सरकार ने वहां जाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। उनकी यह यात्रा दक्षिण कोरियाई सरकार द्वारा लगाए गए सख्त यात्रा प्रतिबंधों का सीधा और खुला उल्लंघन है। दक्षिण कोरिया के कड़े नियमों के तहत बिना सरकारी अनुमति गाजा में प्रवेश करना पूरी तरह से मना है।
किम डोंग-ह्योन से पहले किम आह-ह्यून ने की थी गाजा जाने की कोशिश
किम डोंग-ह्योन से पहले एक अन्य दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ता किम आह-ह्यून ने भी गाजा जाने का प्रयास किया था। उन्होंने अक्टूबर में सरकारी अनुमति के बिना गाजा जाने की एक बड़ी और असफल कोशिश की थी। इस गंभीर उल्लंघन के बाद दक्षिण कोरियाई सरकार ने उनका पासपोर्ट भी पूरी तरह से रद्द कर दिया था।
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उस समय भी इजरायली सेना ने किम आह-ह्यून को हिरासत में लिया था और कुछ समय बाद छोड़ दिया था। वर्तमान में जिस नाव पर वह यात्रा कर रही हैं वह मुख्य जहाज ‘काइरियाकोस एक्स’ के काफी करीब है। इस बात का पूरा खतरा मंडरा रहा है कि इजरायली नौसेना जल्द ही उनकी इस नाव को भी पूरी तरह जब्त कर लेगी।
दक्षिण कोरिया के कड़े नियम और जुर्माना
दक्षिण कोरिया के सख्त नियमों के अनुसार किसी भी नागरिक को गाजा पट्टी में जाने या रहने की बिल्कुल अनुमति नहीं है। नियम तोड़ने पर नागरिक को एक साल तक की जेल या 10 लाख वोन का भारी जुर्माना हो सकता है। यह जुर्माने की रकम लगभग 6,685 अमेरिकी डॉलर के बराबर होती है जिसे चुकाना अनिवार्य है।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार नागरिक समूह ने सोल में स्थित इजरायली दूतावास के सामने एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान समूह के सभी सदस्यों ने हिरासत में लिए गए दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ता की तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने सरकार से भी विशेष अपील की कि वह कार्यकर्ता को सुरक्षित वापस लाने के लिए तुरंत हरसंभव कड़े कदम उठाए।
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जनसंहार पर अंतरराष्ट्रीय चुप्पी
इस नागरिक समूह ने इजरायल पर जनसंहार करने के काफी गंभीर और तीखे आरोप खुले तौर पर लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सहायता अभियान अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गहरी चुप्पी के भारी विरोध में चलाया जा रहा है। पिछले दो वर्षों से चल रहे इजरायल के कथित जनसंहार पर दुनिया भर से कोई भी ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
