सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media)
Israel-Iran War Day 3: इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग आज तीसरे दिन में प्रवेश कर चुकी है और इसके साथ ही विनाश का दायरा बढ़ता जा रहा है। 28 फरवरी को शुरू हुई इस भीषण लड़ाई ने अब पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले 30 घंटों के भीतर खाड़ी क्षेत्र में जो मंजर देखने को मिला है, वह किसी बड़े वैश्विक संकट की ओर इशारा कर रहा है। ताजा खबरों के अनुसार, युद्ध की लपटें अब साइप्रस और कुवैत तक पहुँच गई हैं।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि साइप्रस स्थित उनके अक्रोटिरी (Akrotiri) सैन्य अड्डे पर आधी रात को संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ है। यह हमला उस समय हुआ जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिका को इस बेस का इस्तेमाल ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए करने की अनुमति दी थी। हमले के तुरंत बाद ब्रिटिश सेना ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है और सुरक्षा के लिहाज से सैन्य बेस पर रह रहे सैनिकों के परिवारों को वहां से सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है।
युद्ध के मोर्चे से एक और बड़ी खबर कुवैत से आई है, जहाँ अमेरिका के कई फाइटर जेट क्रैश हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ये जेट हवा में कुछ देर गोल-गोल घूमने के बाद अनियंत्रित होकर जमीन से टकरा गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन युद्ध के बीच अमेरिकी वायुसेना को यह एक बड़ा तकनीकी या सामरिक झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर, कुवैत में अमेरिकी दूतावास के ऊपर भी काले धुएं का गुबार देखा गया है।
अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सेना ने अब तक ईरान के 1000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। शुरुआती 30 घंटों में ही 2000 से ज्यादा बम बरसाए गए हैं। इस भीषण बमबारी में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 740 से अधिक लोग घायल हैं। सबसे हृदयविदारक घटना एक स्कूल पर मिसाइल गिरने की है, जिसमें 180 छात्राओं की मौत हो गई। ज्ञात हो कि युद्ध के पहले दिन ही ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर आई थी, जिसने ईरान को और अधिक आक्रामक बना दिया है।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि ईरान अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगा। लारीजानी का यह बयान उन कयासों को खारिज करने के लिए आया है जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान ने कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिश की है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी जमीन और संप्रभुता पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए प्रतिबद्ध है और फिलहाल ‘टेबल टॉक’ की कोई गुंजाइश नहीं है।
इस महायुद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों जैसे बहरीन, दुबई और दोहा को अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय करने पड़े हैं। यूएई (UAE) ने तेहरान स्थित अपना दूतावास बंद कर दिया है। एयर इंडिया समेत कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट की उड़ानें रद्द कर दी हैं। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे वैश्विक बाजार में महंगाई का खतरा मंडराने लगा है।
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खुफिया रिपोर्टों की मानें तो खामेनेई की मौत के बावजूद ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना फिलहाल कम है, क्योंकि वहां का सैन्य तंत्र पूरी तरह सक्रिय है। अमेरिका, जॉर्डन, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों ने संयुक्त बयान जारी कर शांति की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए यह संघर्ष लंबा खिंचता नजर आ रहा है।