60 दिन का अल्टीमेटम! खामेनेई नहीं झुके तो तबाही तय, मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा खतरा
Middle East Tension:इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका दौरे से लौटने के बाद ईरान को 60 दिनों की मोहलत दी है। इजरायल ने दो टूक कहा है कि अगर ईरान ने दो महीने के भीतर अमेरिका के साथ...
- Written By: अमन उपाध्याय
ईरान को 60 दिन का अल्टीमेटम, (डिजाइन फोटो)
तेल अवीव: ईरान और इजरायल के बीच हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं। अमेरिका से लौटे इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ताज़ा धमकी इस तनाव की पुष्टि करती है। नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को साफ शब्दों में दो महीने का अल्टीमेटम दिया है या तो अमेरिका से समझौता करो या फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। उनका इशारा है कि अगर ईरान झुकने को तैयार नहीं हुआ, तो इजरायल और अमेरिका मिलकर ऐसा हमला करेंगे जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। अब बड़ा सवाल यही है क्या दो महीने बाद जंग होगी?
नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा है ईरान का एटमी कार्यक्रम। क्या ईरान बातचीत से पीछे हटेगा या फिर अमेरिका-इजराइल मिलकर उसकी यूरेनियम संवर्धन की गतिविधियों को सैन्य ताकत से खत्म करेंगे? अभी पूरी दुनिया की नजरें इसी पर टिकी हैं। अमेरिकी दौरे के बाद नेतन्याहू वापस तेल अवीव लौट चुके हैं और ट्रंप की सलाह पर उन्होंने ये 60 दिन की मोहलत दी है।
ईरान को खत्म करनी होगी न्यूक्लियर क्षमता
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को 11 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। इस दौरान ईरान को अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर सहमति बनानी होगी और अपनी न्यूक्लियर क्षमता खत्म करनी होगी। अगर तय समय में कोई समझौता नहीं होता, तो इजरायल अपने तरीके से जवाब देगा। नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देंगे और अरब क्षेत्र का शक्ति संतुलन नहीं बदलने देंगे। ईरान को रोकने के लिए अमेरिका और इजराइल किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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ईरान की अमेरिका से मांग
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ने ईरान पर हमला कर गंभीर चूक की है। अब ईरान केवल तभी वार्ता के लिए तैयार होगा जब अमेरिका अपनी गलती स्वीकार करेगा। ईरान की मांग है कि अमेरिका न सिर्फ माफी मांगे, बल्कि हमले से हुए नुकसान की भरपाई भी करे।
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लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लगता नहीं कि अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार करेगा। नतीजतन, दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना फिलहाल नहीं दिखती। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अगर अगले दो महीने में ईरान ने कोई समझौता नहीं किया, तो उसके एटमी कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजरायल का अगला कदम क्या होगा?
अमेरिका को भी निशाना बनाने की योजना में ईरान
नेतन्याहू के बाद अब इजरायल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट भी अमेरिका दौरे पर रवाना होने वाले हैं। उनका मकसद भी ट्रंप प्रशासन को ईरान के मसले पर साथ लाने की कोशिश करना है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान न सिर्फ इजरायल को खत्म करना चाहता है, बल्कि अमेरिका को भी निशाना बनाने की योजना में है।
नेतन्याहू के मुताबिक, इस वक्त सिर्फ इजरायल ही है जो ईरान के खिलाफ मजबूती से खड़ा है और मोर्चा ले रहा है। हालांकि, इजरायली सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी सुरक्षित और सक्रिय है। ऐसे में साफ है कि इजरायल और अमेरिका का साझा मिशन अभी अधूरा है।
