ईरान का झंडा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Libya Model Nuclear Program: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहीअमेरिका-ईरान शांति वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका की अवैध मांगों के कारण ही इस अहम वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। यह बहुत ही अहम बैठक पूरे 21 घंटे तक चली लेकिन अमेरिका को Islamabad से खाली हाथ लौटना पड़ा है। अब अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए लीबिया मॉडल परमाणु कार्यक्रम को लागू करने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका इस नई रणनीति के तहत सैन्य बल के बजाय कूटनीतिक दबाव से तेहरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना चाहता है। अगर ईरान अमेरिका के इस लीबिया मॉडल को मान लेता है तो उसे अपना परमाणु कार्यक्रम खुद से हमेशा के लिए बंद करना होगा। इसके साथ ही ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम और सभी घातक हथियारों का पूरी तरह से सरेंडर भी करना पड़ेगा।
Islamabad समझौते के बाद ईरान को भविष्य में कभी भी फिर से अपना नया परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की कोई अनुमति नहीं मिलेगी। लीबिया मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के द्वारा ईरान के सभी परमाणु ठिकानों के सख्त निरीक्षण की पूरी अनुमति होगी। यानी अंतरराष्ट्रीय संगठन वहां जाकर कभी भी यह देख सकते हैं कि ईरान में कोई गुप्त परमाणु परीक्षण हो रहा है या नहीं।
हाल ही में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एक बहुत ही अहम मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि वह ईरान के साथ 2003 में लीबिया के साथ हुए समझौते जैसा ही काम करना चाहते हैं। अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन के पुराने बयानों से भी बेंजामिन नेतन्याहू का यह बड़ा बयान पूरी तरह से मेल खाता है।
साल 2003 में हुए इसी ऐतिहासिक समझौते के तहत लीबिया की राजधानी त्रिपोली ने अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म कर दिया था। अमेरिका के लीबिया मॉडल के मुताबिक ईरान द्वारा इसे स्वीकार करने पर उसे भारी आर्थिक राहत और कई अन्य छूट दी जाएगी। ईरान को इसके बदले में सभी तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से पूरी तरह से छूट देने का एक बहुत बड़ा वादा किया गया है।
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हैरान करने वाली बात यह है कि 2003 में लीबिया के नेता गद्दाफी ने अमेरिका की बात मानकर अपना परमाणु कार्यक्रम बंद किया था। लेकिन अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करने के कुछ समय बाद ही लीबियाई नेता गद्दाफी की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। गद्दाफी के करीबियों ने भी बाद में यह माना था कि अपना अहम परमाणु कार्यक्रम बंद करना गद्दाफी की जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी।