ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Israel US Iran War Latest News: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई 48 घंटे की समय सीमा पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश किसी भी ‘पागलपन भरी धमकी’ से डरने वाला नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अगले दो दिनों के भीतर बिना किसी शर्त के इस सामरिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह से नहीं खोलता है तो अमेरिकी सेना ईरान के बिजली संयंत्रों पर बमबारी करके उन्हें मटियामेट कर देगी। ट्रंप का यह अल्टीमेटम वैश्विक तेल आपूर्ति में आ रही बाधाओं और बढ़ती कीमतों के बीच आया है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ट्रंप को जवाब देते हुए लिखा कि ईरान को नक्शे से मिटाने का भ्रम दरअसल अमेरिकी हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि धमकियां और आतंक हमारे संकल्प को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत करते हैं। हम युद्धभूमि में किसी भी पागलपन भरी धमकी का निर्णायक तरीके से सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि होर्मुज का रास्ता उन देशों के लिए खुला है जो उनकी संप्रभुता का सम्मान करते हैं लेकिन ‘दुश्मन’ देशों (अमेरिका और इजरायल) के लिए पाबंदियां जारी रहेंगी।
The illusion of erasing Iran from the map shows desperation against the will of a history-making nation. Threats and terror only strengthen our unity. The Strait of Hormuz is open to all except those who violate our soil. We firmly confront delirious threats on the battlefield. — Masoud Pezeshkian (@drpezeshkian) March 22, 2026
इस तनाव के बीच ईरान के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। ईरानी राष्ट्रपति के सहयोगी इस्माइल सेकब इस्फहानी ने नागरिकों से अपील की है कि वे अगले 48 घंटों के लिए पानी का स्टॉक कर लें और अपने फोन चार्ज रखें। वहीं, ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ तो इसका असर केवल ईरान पर नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बिजली संकट के रूप में देखने को मिलेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है जहां से विश्व के लगभग 20% तेल और गैस का परिवहन होता है। ईरान के भौगोलिक नियंत्रण के कारण यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और शक्ति संतुलन की लड़ाई का मुख्य केंद्र बन गया है।