चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-सोशल मीडिया)
China Iran Military Partnership, Strategic Defense Cooperation Middle East: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान भले ही मोर्चे पर अकेला दिखाई दे रहा हो, लेकिन हकीकत में उसे चीन का गुप्त और मजबूत समर्थन मिल रहा है। चीन सीधे युद्ध में नहीं उतरा है, लेकिन वह सैन्य तकनीक और आधुनिक उपकरणों के जरिए तेहरान की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है। दोनों देशों की यह गहरी होती साझेदारी अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि युद्ध के मैदान में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। चीनी हथियारों और तकनीकी मदद ने ईरान को इस काबिल बना दिया है कि वह अमेरिका और इजराइल जैसे शक्तिशाली देशों का डटकर मुकाबला कर सके।
चीन पिछले कई वर्षों से ईरान को उन्नत रक्षा तकनीक, मिसाइल प्रणालियां और घातक ड्रोन तकनीक विकसित करने में निरंतर सहायता प्रदान करता आ रहा है। इस तकनीकी सहयोग के कारण ही ईरान आज क्षेत्र में एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में खुद को मजबूती से स्थापित करने में सफल हुआ है। ईरान द्वारा इस्तेमाल किए गए चीनी तकनीक वाले हथियारों ने अमेरिकी सेना को युद्ध क्षेत्र में उनकी असली काबिलियत और कमियों का अहसास कराया है।
चीन ने ईरान को अपने आधुनिक सैटेलाइट नेटवर्क और रिमोट सेंसिंग इमेजरी तक पहुंच प्रदान की है, जिससे वह दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखता है। इसी हाई-डेफिनिशन डेटा की मदद से ईरान ने मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी बेस और कमांड सेंटरों पर बेहद सटीक और घातक हमले किए हैं। इतना ही नहीं, चीन के तकनीकी सहयोग से ईरान ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम और रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट्स को भी काफी हद तक आधुनिक बना लिया है।
चीन की प्रमुख कंपनियां ईरान में सुरक्षित फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क और 5G जैसी डिजिटल तकनीक विकसित करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से ईरान का संचार नेटवर्क अब पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और आधुनिक युद्ध के अनुकूल बन चुका है। इसके अलावा जून 2025 के संघर्ष के बाद चीन ने ईरान को आधुनिक रडार सिस्टम और साइबर सुरक्षा तकनीक भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराई है।
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ईरान, चीन और रूस ने मिलकर हिंद महासागर और ओमान की खाड़ी में कई बार संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया है। इन अभ्यासों के जरिए ईरानी सेना को आधुनिक युद्ध रणनीतियों और विभिन्न तकनीकी समन्वय का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिला है। यह साझा शक्ति प्रदर्शन अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक कड़ा संदेश देता है कि मुश्किल वक्त में ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला नहीं है।