'बुनियादी ढांचों' पर हमला हुआ तो... ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने US- इजरायल को दी आखिरी चेतावनी

Iran Us War: ईरान-अमेरिका युद्ध के एक महीने पूरे होने पर राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दुश्मनों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि बुनियादी ढांचों पर हमला हुआ तो अंजाम बेहद बुरा होगा।
"If 'Infrastructure' Is Attacked...": Iranian President Masoud Pezeshkian Issues Final Warning to US and Israel
मसूद पेजेश्कियन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Masoud Pezeshkian Warning Us: मिडिल-ईस्ट  में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने कड़े इरादे जाहिर कर दिए हैं। इजरायल और अमेरिका के साथ जारी युद्ध को एक महीना पूरा होने के अवसर पर पेजेश्कियन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ईरान अपनी संप्रभुता और संसाधनों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। 28 मार्च 2026 को जारी अपने बयान में उन्होंने अपने विरोधियों को चेतावनी दी कि उनकी शांति को उनकी कमजोरी न समझा जाए।

हम पहले हमला नहीं करते

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी पोस्ट के जरिए अपनी रक्षा नीति को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि ईरान ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि हम युद्ध की शुरुआत करने वाले पहले पक्ष नहीं होते लेकिन अगर हमारे बुनियादी ढांचे या देश के आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाने की कोशिश की गई तो हमारा जवाबी प्रहार बहुत कड़ा और विनाशकारी होगा। यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें ईरान के आर्थिक और ऊर्जा केंद्रों पर संभावित हमलों की आशंका जताई गई थी।

पड़ोसी देशों को खुली चेतावनी

पेजेश्कियन ने केवल अमेरिका और इजरायल को ही नहीं बल्कि मिडिल-ईस्ट के अन्य देशों को भी कड़ा संदेश भेजा है। उन्होंने पड़ोसी देशों से आग्रह किया कि यदि वे अपने क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक विकास चाहते हैं तो उन्हें अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के दुश्मनों को नहीं करने देना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि दुश्मनों को युद्ध के लिए जमीन या संसाधन मुहैया कराना क्षेत्रीय अस्थिरता को निमंत्रण देना होगा।जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ सकता है।

अमेरिकी ठिकानों पर भारी नुकसान

युद्ध की जमीनी हकीकत पर बात करते हुए सूत्रों ने बताया कि 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमले के बाद से ही ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। ईरान ने विशेष रूप से सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अमेरिका को भारी चोट पहुंचाई है। बताया जा रहा है कि मध्य पूर्व में स्थित अमेरिका के लगभग 13 सैन्य बेस अब रहने या इस्तेमाल करने लायक नहीं रह गए हैं जिसे वॉशिंगटन के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

बढ़ता मानवीय संकट

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 1,200 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में लगातार हो रही बमबारी ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन का यह ताजा बयान संकेत देता है कि ईरान पीछे हटने के मूड में नहीं है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है।

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