Iran-US तनाव: इज़राइल में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों का जखीरा, परमाणु ठिकानों पर हमले की तैयारी से बढ़ा खतरा
Iran-US War: ईरान के साथ तनाव के बीच, US इज़राइल को और ज़्यादा रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भेज रहा है। नए वॉर प्लान में ईरान के न्यूक्लियर और मिलिट्री साइट्स को टारगेट करना शामिल है।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
अमेरिकरी राष्ट्पति और 'एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग' विमान (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran-US Tension: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अपने सैन्य अभियान को और अधिक विस्तार देने की तैयारी में जुट गया है। इसी रणनीतिक कदम के तहत, अमेरिका अब इजराइल में दर्जनों अतिरिक्त ‘एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग’ विमान तैनात कर रहा है। इन विमानों का मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी के लड़ाकू और बॉम्बर विमानों को हवा में ही ईंधन की सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी रुकावट के लगातार अपने मिशन को अंजाम दे सकें।
गौर करने वाली बात यह है कि इजराइल में पहले से ही 60 से अधिक अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान मौजूद हैं, और इस नई तैनाती के बाद यह संख्या और बढ़ जाएगी। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन ने इजराइल को इस बड़े सैन्य बदलाव की जानकारी दे दी है। इस कदम ने मध्य-पूर्व में वॉर प्लान के समीकरण बदल दिए हैं। आखिर अमेरिका का यह नया वॉर प्लान क्या है? जमीन पर वर्तमान हालात कितने गंभीर हैं और इजराइल में इन विमानों की भारी तैनाती को लेकर घरेलू राजनीति में क्यों उबाल आया है? आइए, विस्तार से समझते हैं इस पूरे घटनाक्रम और उसके संभावित प्रभावों को।
इजराइल में कितने विमान मौजूद हैं
आपको बता दें कि वर्तामान में इजराइल के पास लगभग 60 अमेरिकि रिफ्यूलिंग विमानों की तैनाती की गई हैं। जिसमें से 30 विमान तेल के अविव के पास बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर और 30 विमान दक्षिणी इजराइल के रेमन हवाईअड्डे पर मौजूद हैं। वहीं आने वालें कुछ दिनों में पेंटागन दर्जनों और विमानों के भेजने की तैयारी में जूटा हुआ है। क्योंकि क्षेत्र के अन्य एयरबेस पर ईरान के मिसाइल या ड्रोनों के हमलों का खतरा अधिक माना जा रहा था।
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अमेरिका का नया ‘वॉर प्लान’ क्या है?
अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को और अधिक व्यापक बनाने की योजना बना रहा है। हाल ही में व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक में कई नए सैन्य विकल्पों पर विचार किया गया है।
- ईरान की बुनियादी ढांचों पर हमला: ईरान के पावर प्लांट (बिजली संयंत्र) और अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक व सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना।
- परमाणु ठिकाने: ईरान की संदिग्ध परमाणु सुविधाओं, जिनमें भूमिगत ठिकाने (जैसे ‘पिकएक्स माउंटेन’ साइट) भी शामिल हैं, पर हमले की संभावना।
अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और वाशिंगटन की परमाणु शर्तों को मानने के लिए मजबूर करना है।
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जमीन पर क्या हालात हैं?
अमेरिका के द्वारा ने ईरान के खिलाफ लगातार सातवें दिन भी अपने हवाई हमले जारी रखा है। इसमें ईरान में स्थित आधा दर्जन पुलों को बर्बाद कर दिया है। वहीं सैन्य लॉजिस्टिक हब, और रडार साइट्स को निशाना बनाया गया है। जिसके बाद ईरान भी जवाबी कार्रवाई में कुवैत, कतर, बहरीन, जॉर्डन और इराक में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं।
