ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची जेनेवा के लिए रवाना (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran US Indirect Nuclear Negotiations: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के साथ जेनेवा के लिए रवाना हो चुके हैं। यह यात्रा अमेरिका के साथ होने वाली अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के तीसरे दौर में शामिल होने के लिए आयोजित की गई है। इस कूटनीतिक प्रयास का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव को कम करना और परमाणु चिंताओं को सुलझाना है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे पूरी ईमानदारी और साझा हितों की रक्षा के संकल्प के साथ इस वार्ता की मेज पर लौट रहे हैं।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी के कारण तनाव काफी बढ़ा हुआ है। अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि गुरुवार से शुरू होने वाली यह वार्ता न्यायसंगत और समान सिद्धांतों पर आधारित होगी। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि कूटनीति को प्राथमिकता देकर ही इस जटिल स्थिति का समाधान निकालना संभव है।
विदेश मंत्री के अनुसार दोनों देशों के पास एक ऐसा ऐतिहासिक अवसर है जिससे पारस्परिक चिंताओं का पूरी तरह समाधान किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि यदि दोनों पक्ष ईमानदारी दिखाएं तो एक अभूतपूर्व समझौता करना पूरी तरह संभव है। ईरान का लक्ष्य एक ऐसा साझा ढांचा तैयार करना है जो सभी पक्षों के हितों की रक्षा कर सके।
संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि अमेरिका के प्रति उनके पास गरिमा-आधारित कूटनीति और मजबूत रक्षा जैसे सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अपनी संप्रभुता के साथ समझौता किए बिना बातचीत को आगे बढ़ाना चाहता है। यह बयान ईरान की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वे कूटनीति और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि वे टकराव को कूटनीति से सुलझाना पसंद करते हैं। हालांकि उन्होंने एक स्पष्ट चेतावनी भी दी कि वे कभी भी ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देंगे। ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि वार्ता के बावजूद अमेरिका की मुख्य चिंता ईरान की परमाणु क्षमता पर अंकुश लगाना है।
ईरान के उप विदेश मंत्री मजिद तक़्त रावांची ने एक रेडियो साक्षात्कार में कहा कि वे समझौता हासिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी पक्षों में दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति है तो जेनेवा में एक सकारात्मक परिणाम जल्द ही मिल सकता है। ईरान उम्मीद कर रहा है कि उनकी सद्भावना का जवाब अमेरिकी पक्ष की ओर से भी सकारात्मक रूप में मिलेगा।
रावांची ने NPR रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में यह दोहराया कि ईरान पूरी ईमानदारी के साथ वार्ता कक्ष में प्रवेश करेगा। उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते को सफल बनाने के लिए जो भी आवश्यक होगा, उनका देश वह सब करने के लिए तैयार है। यह लचीला रुख दिखाता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से राहत पाने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।
जेनेवा में होने वाली इस वार्ता का असर न केवल ईरान और अमेरिका पर बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर पड़ेगा। अमेरिकी सैन्य तैनाती के बीच कूटनीति की यह पहल शांति स्थापना की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अगर यह तीसरे दौर की बातचीत सफल रहती है, तो इससे क्षेत्र में स्थिरता आने की काफी संभावना है।
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पूरी दुनिया की नजरें अब जेनेवा पर टिकी हैं जहां दोनों पक्षों के प्रतिनिधि प्रतिनिधिमंडल साझा जमीन तलाशने की कोशिश करेंगे। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और उनकी टीम के लिए यह वार्ता एक बड़ी चुनौती और बड़ा अवसर दोनों ही साबित हो सकती है। कूटनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं को कितनी गहराई से समझते हैं।