Iran US Conflict: पाकिस्तान ने एयरबेस पर छिपाए ईरानी विमान, अमेरिकी रिपोर्ट से मचा भारी बवाल
Iran US Conflict: अमेरिकी रिपोर्ट का दावा है कि पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर छिपाकर अमेरिकी हवाई हमलों से बचाया है। इससे क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति में नई बहस शुरू हो गई।
- Written By: प्रिया सिंह
पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (सोर्स-सोशल मीडिया)
News Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के दौरान पाकिस्तान की भूमिका पर एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। एक अमेरिकी न्यूज चैनल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में एक बहुत ही सनसनीखेज और चौंकाने वाला दावा किया है। इन दोनों देशों के बीच भले ही संघर्षविराम लागू हो, लेकिन ऐसी खबरें स्थिति को बिगाड़ सकती हैं।
इस विस्तृत अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर खड़ा होने की अनुमति दी थी। ऐसा मुख्य रूप से इसलिए किया गया था ताकि ये सभी ईरानी विमान सीधे अमेरिकी हवाई हमलों से सुरक्षित बच सकें। इस बड़े और चौंकाने वाले दावे ने पूरी दुनिया की क्षेत्रीय राजनीति में भारी कूटनीतिक हलचल मचा दी है।
नूर खान एयरबेस का इस्तेमाल का दावा
अप्रैल के महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की अहम घोषणा की गई थी। इसके तुरंत बाद ईरान ने अपने कई सैन्य विमान पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर भेजे थे। इन सैन्य विमानों में जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने वाला एक बेहद खास विमान भी शामिल बताया गया है।
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इस सनसनीखेज अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ विमान अफगानिस्तान भी भेजे थे। ईरानी एयरलाइन ‘महान एयर’ का एक नागरिक विमान युद्ध शुरू होने से ठीक पहले काबुल पहुंच गया था। बाद में ईरानी एयरस्पेस पूरी तरह बंद होने के कारण उसे सीमा के पास हेरात एयरपोर्ट भेज दिया गया।
अमेरिकी सीनेटर की चेतावनी
अमेरिका के एक प्रमुख सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की इस पूरी संदिग्ध कूटनीतिक भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने खुले तौर पर कहा है कि अमेरिका को मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से गंभीरता से विचार करना चाहिए। पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के पहले के बयानों को देखते हुए उन्हें इस खबर से हैरानी नहीं हुई।
दूसरी ओर पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इन सभी अमेरिकी दावों को पूरी तरह से गलत और निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नूर खान एयरबेस शहर के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है, इसलिए वहां इतनी बड़ी संख्या में विमान छिपाना संभव नहीं है। पाकिस्तान इस संवेदनशील मामले में अपने ऊपर लगे हर आरोप से लगातार पूरी तरह इनकार कर रहा है।
इस पूरे मामले के बीच एक अन्य अहम रिपोर्ट में पाकिस्तान की चीन पर बढ़ती सैन्य निर्भरता का भी साफ जिक्र है। वर्ष 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान को मिलने वाले बड़े हथियारों में लगभग 80 प्रतिशत हथियार केवल चीन से ही आए हैं। पाकिस्तान वर्तमान में चीन और ईरान दोनों के साथ अपने करीबी संबंधों को संतुलित करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
