ट्रंप के दो बड़े दुश्मन हुए एक, ईरान ने रूस के साथ कर लिया बड़ा परमाणु समझौता, UN नाराज
Iran News: ईरान और रूस एक बड़े परमाणु समझौते के करीब हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब संयुक्त राष्ट्र ईरान पर प्रतिबंधों को फिर से लागू करने पर विचार कर रहा है।
- Written By: अक्षय साहू
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी (फोटो- सोशल मीडिया)
Iran-Russia Nuclear Deal: ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी बातचीत के लिए रूस की राजधानी मास्को पहुँच गए हैं। जहां वो रूस के साथ एक बड़ा परमाणु समझौता कर सकते हैं। यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया ने सोमवार को दी।
ईरान और रूस के बीच यह समझौता ऐसे समय में होने जा रहा है, जब संयुक्त राष्ट्र इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगाए जाएँ, क्योंकि उस पर संदेह है कि वह परमाणु समझौते का पालन नहीं कर रहा है।
अमेरिका और यूरोपीय देश खिलाफ
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हमेशा के लिए हटाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव को रूस और चीन ने समर्थन दिया, लेकिन ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने इसका विरोध किया और प्रतिबंधों को वापस लाने की कोशिश की। यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताते आया है।
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वहीं, यूरोपीय देश आरोप लगाते हैं कि ईरान 2015 में हुए उस समझौते का पालन नहीं कर रहा, जिसका उद्देश्य था कि वह परमाणु हथियार न बनाए। लेकिन ईरान का कहना है कि उसका इरादा सिर्फ शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का है। रूस भी इसी बात का समर्थन करता है।
इस्लामी ने बताया कि रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे, जिनमें आठ नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने की योजना भी शामिल है। ईरान 2040 तक 20 गीगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करना चाहता है।
बिजली संकट से जूझ रहा ईरान
ईरान के पास फिलहाल एक ही परमाणु संयंत्र है, जो बुशहर शहर में है। इसे रूस ने बनाया है और इसकी क्षमता 1 गीगावाट है। गर्मियों जैसे समय में ईरान को अक्सर बिजली की कमी का सामना करना पड़ता है।
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ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने यह प्रस्ताव रखा है कि अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को फिर से परमाणु ठिकानों की जांच करने दे और अमेरिका से बातचीत करे, तो प्रतिबंधों को 6 महीने के लिए रोका जा सकता है। अगर 27 सितंबर तक कोई समझौता नहीं होता, तो सभी पुराने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध अपने आप फिर से लागू हो जाएंगे।
