ईरान में तख्तापलट की आहट तेज! भारी मात्रा में सोना भेजा जा रहा बाहर, क्या रूस भागेंगे अली खामेनेई?
Iran Protests News Hindi: ईरान में प्रदर्शनों के बीच सोना बाहर भेजे जाने की खबरों ने तख्तापलट की आशंका बढ़ा दी है। ब्रिटिश सांसद का दावा है कि सर्वोच्च नेता खामेनेई मॉस्को में शरण ले सकते हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
ईरान में तख्तापलट की आहट तेज, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Ali Khamenei Fleeing to Russia: ईरान में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ब्रिटिश सांसद और पूर्व सुरक्षा मंत्री टॉम टुगेनहाट ने एक गंभीर दावा किया है। ब्रिटिश संसद के एक सत्र के दौरान उन्होंने बताया कि ईरान से बड़े पैमाने पर सोना बाहर भेजा जा रहा है।
टुगेनहाट के अनुसार, यह इस बात का स्पष्ट संकेत हो सकता है कि ईरानी सरकार तख्तापलट के बाद की स्थितियों के लिए पहले से ही अपनी ‘एग्जिट स्ट्रेटजी’ (निकलने की योजना) तैयार कर रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रूसी कार्गो विमान लगातार तेहरान में उतर रहे हैं, जो कथित तौर पर हथियार और गोला-बारूद लेकर आ रहे हैं।
क्या मॉस्को भागेंगे सर्वोच्च नेता अली खामेनेई?
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और खुफिया रिपोर्टों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरान में जन आंदोलन और अधिक उग्र होता है, तो खामेनेई मॉस्को भागने की योजना बना सकते हैं। रूसी कार्गो विमानों की तेहरान में बढ़ती सक्रियता को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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शाही परिवार की अपील
ईरान में आंतरिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। ईरान के पूर्व शाही परिवार से जुड़े प्रिंस रजा पहलवी ने जनता से सीधी अपील की है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया है कि वे 8 और 9 जनवरी को रात 8 बजे अपने घरों और सड़कों से सरकार के खिलाफ नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराएं। 4 जनवरी के बाद से ही देश के कई हिस्सों में ‘राष्ट्रीय विद्रोह’ जैसे हालात बने हुए हैं।
ओबामा की तरह नहीं हैं ट्रंप
ईरान की इस अस्थिरता पर अमेरिका ने भी कड़ा रुख अपनाया है। रिपब्लिकन नेता लिंडसे ग्राहम ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी सरकार अपने ही लोगों पर अत्याचार जारी रखती है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कड़ा कदम उठा सकते हैं। ग्राहम ने स्पष्ट किया कि ट्रंप, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह केवल मूकदर्शक नहीं रहेंगे बल्कि प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े होंगे।
अमेरिका की सख्त चेतावनी
ट्रंप ने खुद 5 जनवरी और फिर 12 जनवरी को यह दोहराया कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं तो ईरान को अमेरिका की तरफ से ‘कड़ी सजा’ भुगतनी होगी। इस बीच, ब्रिटेन और जर्मनी में अमेरिकी सैन्य जेट विमानों की तैनाती की खबरें भी सामने आई हैं जिसे ईरान पर संभावित कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
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बदलाव की आहट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदर्शन इसी तरह जारी रहे, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान के हालातों और वहां से बाहर भेजे जा रहे ‘सोने के भंडार’ पर टिकी हुई हैं।
