ईरान में प्रदर्शनकारियों के सिर में मारी गई गोली, मौतों का आंकड़ा 16 हजार के पार, खामेनेई ने भी किया स्वीकार

Iran Protests: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब सरकार विरोधी आंदोलन में बदल चुका है, जिसमें 16,500 से अधिक लोग मारे गए और 3,30,000 से ज्यादा घायल हुए।
Iran Death Toll Protest Against Ali Khamenei
ईरान में अब तक 16 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Iran Death Toll Protest Against Ali Khamenei: दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब ईरान में एक बड़े संकट का रूप ले चुके हैं। यह विरोध शुरुआत में आर्थिक समस्याओं जैसे महंगाई और रियाल की गिरावट से उपजा था, लेकिन जल्द ही यह सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ भी नारेबाजी की। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई में 16,500 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और 3,30,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ज्यादातर पीड़ित युवा हैं, जिनकी उम्र 30 वर्ष से कम है।

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने 3,090 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें अधिकतर प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इसके अलावा, 22,000 से अधिक गिरफ्तारियां की गईं हैं। सुप्रीम लीडर खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अशांति के दौरान कई हजार मौतें हुई हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस हिंसा का दोषी ठहराया और प्रदर्शनकारियों को अमेरिका का 'फुट सोल्जर' करार दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अधिकांश घायलों को सिर, गर्दन और छाती में गोली लगी, जो सैन्य-ग्रेड हथियारों के इस्तेमाल को दर्शाता है।

विरोध प्रदर्शनों में मरे हजारों नागरिक

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने हाल ही में स्वीकार किया है कि पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों में हजारों ईरानी नागरिकों की जान चली गई है। खामेनेई ने इन मौतों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों को उकसाया और उन्हें अमेरिकी सैन्य समर्थन का वादा किया।

हालांकि, स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान में एक हफ्ते के बंद के बाद रविवार से स्कूल फिर से खुल रहे हैं। समाचार एजेंसी ISNA ने बताया कि तेहरान समेत कई शहरों में 10 जनवरी से स्कूलों को फिर से खोला जाएगा। इसके अलावा, जिन कॉलेज परीक्षाओं को पहले टाल दिया गया था, वे अब 24 जनवरी को आयोजित की जाएंगी। देश में चल रहे बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा उपायों के चलते स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे। 

खामेनेई पर नरसंहार के आरोप

जर्मन-ईरानी नेत्र सर्जन प्रोफेसर अमीर परस्ता ने इसे "डिजिटल अंधेरे के कवर में नरसंहार" कहा है। तेहरान के प्रमुख अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, हजारों लोग आंखों की चोटों से जूझ रहे हैं, जिनमें से 700 से 1,000 लोग अपनी आंखें खो चुके हैं। कई मौतें खून की कमी से हुईं, क्योंकि सुरक्षा बलों ने कुछ मामलों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की इजाजत नहीं दी। इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण देश में सूचना का प्रवाह ठप हो गया है, जिससे ईरान दुनिया से अलग-थलग पड़ गया है।

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