'विरोध में कयामत तक खड़ी रहूंगी...' महबूबा मुफ्ती का ईरान समर्थन में प्रदर्शन, ट्रंप-नेतन्याहू के जलाए पुतले

America Iran War: ईरान पर हुए हमले को लेकर महबूबा मुफ्ती ने आज इजरायल और अमेरिका के खिलाफ विरोध जाहिर किया है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू का पुतला फूंका है।
America Iran War
Mehbooba Mufti (Image Source: Social Media)
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Mehbooba Mufti Against Israel US: जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने ट्रंप और नेतन्याहू का पुतला जलाकर यह साबित कर दिया कि वह अमेरिका और इजरायल के हमलों का कड़ा विरोध करती हैं और ईरान के साथ खड़ी हैं। महबूबा मुफ्ती के प्रदर्शन में शामिल हुए समर्थकों के हाथों में खामेनेई के पोस्टर दिखाई दिए और लोगों ने इजरायल और अमेरिका के विरोध में जोरदार नारे लगाए।

मीडिया से बात करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम पूरी दुनिया के लोगों को यह पैगाम देना चाहते हैं कि कश्मीर के लोग ईरान के लोगों के साथ हैं। हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि इस मुद्दे पर जो लोग आज जेलों में बंद हैं, उन्हें रिहा किया जाए।

महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?

सोशल मीडिया पर विरोध का वीडियो पोस्ट करते हुए महबूबा मुफ्ती ने लिका, "मैं उन लोगों के साथ शांति से खड़ी हूं, जो शांति के साथ खड़े हैं, और जो विरोध करते हैं, उनके विरोध में कयामत तक खड़ी रहूंगी।”

महबूबा का यह कहना साफ दर्शाता है कि वह ईरान के समर्थन में मजबूती से खड़ी हैं। इसके अलावा मुफ्ती ने मीडिया से बात भी की और कई मुद्दों पर अपना रुख साफ किया।

पोस्टर में जेफरी एपस्टीन की तस्वीर भी शामिल

जिन पोस्टर्स में महबूबा मुफ्ती ने आग लगाई उसमें जेफरी एपस्टीन भी दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान पार्टी के समर्थकों के हाथ में खामेनेई की तस्वीर भी दिखाई दी। इस मौके पर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि 5-6 दिनों से चल रहे ईरान अमेरिका युद्ध में वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई शहीद हो गए हैं। जिसकी वजह से लोगों ने गुस्से को जाहिर करने की कोशिश की है और उसका नतीजा यह हुआ है कि आज कई लोग जेल में बंद हैं।

महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा कि हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि इस मुद्दे पर जो लोग आज जेलों में बंद हैं, उन्हें रिहा किया जाए।

OIC का भी कर चुकी हैं विरोध

इससे पहले पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने ईरान पर हुए हमले को लेकर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन की चुप्पी का भी विरोध किया था। उन्होंने ओआईसी की निंदा करते हुए उसे मूकदर्शक बताया था और इसे मुस्लिम उम्माह की सामूहिक अंतरात्मा और हितों के साथ घोर विश्वासघात बताया था।

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