ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Masoud Pezeshkian Apology IRGC: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में दिए गए अपने बयान को लेकर स्पष्ट किया है कि उनका मतलब गलत समझा गया। मसूद ने खाड़ी देशों पर हमलों को रोकने और उनसे माफी मांगने के संदर्भ में जो बयान दिया था, उसे लेकर उनका कहना है कि दुश्मन इसे गलत अर्थ देने की कोशिश कर रहा है।
मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को कहा, “हमने हमेशा पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्तों की आवश्यकता पर जोर दिया है। हम हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम किसी पड़ोसी देश के साथ झगड़ा करना चाहते हैं।”
शनिवार को एक टेलीविजन संदेश में मसूद ने कहा था कि उन्हें उन पड़ोसी देशों से माफी मांगनी चाहिए जिन पर हमले हुए हैं। उनका यह भी कहना था कि ईरान अब तब तक हमला नहीं करेगा जब तक उस तरफ से कोई अटैक नहीं होता। लेकिन इस बयान के बाद ईरानी सेना और IRGC ने इसे स्वीकार नहीं किया और हमले जारी रखे। राष्ट्रपति के इस कदम पर तेहरान में काफी आलोचना हुई और इसे उनके दबाव में झुकने के रूप में देखा गया।
ईरानी ज्यूडिशियरी चीफ और IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रपति के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। सेना की ओर से जारी हमलों ने ईरानी शासन में दो धड़े होने और राष्ट्रपति पर दबाव की स्थिति को उजागर किया। इस बीच, राष्ट्रपति ने अपने बयान की व्याख्या करते हुए कहा कि इसे गलत समझा गया और उनका उद्देश्य पड़ोसियों के साथ तनाव बढ़ाना नहीं था।
28 फरवरी से इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के अलावा खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। सऊदी अरब, कुवैत, कतर, यूएई और बहरीन में हमले हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल गई। ईरान के भीतर भी इस रणनीति को लेकर एकरूपता नहीं है।
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इन हमलों में ईरान को भारी जनहानि और आर्थिक नुकसान हुआ है। एक हफ्ते की लड़ाई में करोड़ों डॉलर की संपत्तियां तबाह हो चुकी हैं। इसके साथ ही 1,500 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जिसमें 165 स्कूली बच्चियां भी शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय राजनीति और ईरानी नेतृत्व में गहरे मतभेदों को उजागर किया है।