ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Path To End Iran Conflict: आज के दौर में शांति की राह खोजना बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि युद्ध केवल विनाश लाता है। मिडिल ईस्ट में जारी 13 दिनों के भीषण संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने जंग रोकने का एक रास्ता दिखाया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर कुछ जायज शर्तें मान ली जाएं तो इस खूनी खेल को रोका जा सकता है। ईरान संघर्ष को समाप्त करने के मार्ग की तलाश में दुनिया अब इन शर्तों और उन पर आने वाली प्रतिक्रियाओं को बहुत ध्यान से देख रही है।
मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए तीन मुख्य मांगों को सबके सामने रखा है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी मान्यता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस युद्ध से हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग भी मजबूती से उठाई है।
राष्ट्रपति ने तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त के रूप में भविष्य के लिए एक ठोस सुरक्षा गारंटी की मांग की है। उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करते हुए साफ कर दिया कि शांति के लिए ये वादे जरूरी हैं। उनका मानना है कि बिना किसी अंतरराष्ट्रीय गारंटी के भविष्य में दोबारा हमले होने का डर बना रहेगा।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को लेकर एक बिल्कुल अलग और बहुत बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की वायु सेना और रक्षा प्रणाली अब पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार अब ईरान के पास जवाबी कार्रवाई करने के लिए सैन्य रूप से कुछ भी शेष नहीं बचा है।
ट्रंप ने संकेतों में यह भी कहा कि यह जंग बहुत जल्द खत्म हो सकती है क्योंकि उनके सैन्य टारगेट पूरे हो गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान पिछले 47 सालों से जो कर रहा था अब उसे उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि अमेरिका ने अभी तक अपनी किसी औपचारिक शांति योजना या युद्ध विराम रणनीति का खुलासा नहीं किया है।
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इस पूरे विवाद के बीच लेबनान के हालात भी बहुत ज्यादा खराब होते जा रहे हैं जहां इजराइली हमले लगातार जारी हैं। इजराइल की सेना ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों और बुर्ज अल-बरजनेह जैसे रिहायशी क्षेत्रों को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाई है। इन हमलों के कारण आम नागरिकों और विशेष रूप से मासूम बच्चों और महिलाओं की जान जा रही है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 600 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है जिनमें 86 बच्चे भी शामिल हैं। करीब 1 हजार 444 लोग घायल हो चुके हैं और कई परिवार अब बेघर होकर सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। यह मानवीय स्थिति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और पूरी मानवता के लिए एक बहुत बड़ी और गंभीर चुनौती बन चुकी है।