ईरान ने अपनी सैन्य नीति में बड़ा बदलाव किया है, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Israel Conflict Hindi News: ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर पहुंच गए हैं। तेहरान टाइम्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपनी वर्षों पुरानी ‘स्ट्रैटेजिक पेशेंस’ की नीति को छोड़ने का आधिकारिक फैसला किया है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान की नींव को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी रणनीति के जवाब में अब ‘निर्णायक और प्रभावी’ कदम उठाए जाएंगे। परिषद ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि कोई भी नया अवैध आक्रमण दुश्मन की आखिरी गलती साबित होगा।
ट्रंप की ‘लॉक्ड और लोडेड’ धमकी और ईरान का जवाब तनाव की ताजा वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है जिसमें उन्होंने ईरान में चल रहे आंतरिक प्रदर्शनों का समर्थन किया था। ट्रंप ने कहा था कि यदि तेहरान प्रदर्शनकारियों का दमन बंद नहीं करता तो अमेरिका हस्तक्षेप के लिए पूरी तरह ‘लॉक्ड’ और ‘लोडेड’ है।
इसके जवाब में ईरान ने अपनी सेना को ‘स्टैंडबाय’ पर रखते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। ईरानी रणनीतिकारों का मानना है कि ट्रंप को लगता है कि प्रदर्शन ईरान को कमजोर कर रहे हैं लेकिन सरकार ने उन पर नियंत्रण पा लिया है और अब हमला करने वालों के लिए नर्क के द्वार खुल जाएंगे।
ईरान की नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक’ (पूर्व-निवारक हमला) है। अब तक ईरान केवल जवाबी कार्रवाई तक खुद को सीमित रखता था, लेकिन अब परिषद ने घोषणा की है कि यदि उसे जरा भी आभास हुआ कि दुश्मन ईरान को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता है तो वह पहले हमला कर देगा। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय है क्योंकि इससे क्षेत्र में सीधे सैन्य टकराव की संभावना बढ़ गई है।
ईरान ने अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए अपनी मिसाइल तकनीक का हवाला दिया है। ईरान के पास ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन्स हैं जो मध्य पूर्व में स्थित किसी भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने को तबाह कर सकते हैं। ईरान का दावा है कि उसके पास Fattah-1 जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं जिनकी गति Mach 13-15 तक है और रेंज 1,400 किलोमीटर है।
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हालांकि पश्चिमी विश्लेषक हाइपरसोनिक दावों पर संदेह जताते हैं लेकिन वे मानते हैं कि ईरान ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और उन्नत गाइडेंस सिस्टम विकसित कर लिए हैं जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम हैं।
ईरान में युद्ध और सुरक्षा से जुड़े ये बड़े फैसले सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा लिए जाते हैं। इस निकाय का नेतृत्व राष्ट्रपति करते हैं और इसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई, सशस्त्र बलों के प्रमुख, विदेश मंत्री और खुफिया प्रमुख शामिल होते हैं। इसी परिषद ने तय किया है कि अब ईरान का जवाब सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरी शक्ति के साथ दिया जाएगा।