परमाणु बम की दहलीज पर ईरान! महायुद्ध ने बदला तेहरान का गेमप्लान, क्या अब टूटेगा दशकों पुराना ‘परमाणु फतवा’?
Iran US War: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच तेहरान ने अपना परमाणु रुख बदल दिया है। सैन्य दबाव और परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद अब ईरान में परमाणु हथियार को ही 'अस्तित्व की गारंटी' माना जा रहा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
इजरायल-अमेरिका-ईरान जंग, (डिजाइन फोटो)
US Iran Nuclear Tensions: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने एक ऐसा विरोधाभास पैदा कर दिया है जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। जिस युद्ध का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना था वही युद्ध अब ईरान को परमाणु बम बनाने के लिए उकसा रहा है। 30 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान अब अपनी उस पुरानी नीति पर पुनर्विचार कर रहा है जिसके तहत उसने परमाणु कार्यक्रम को केवल नागरिक उद्देश्यों तक सीमित रखने का दावा किया था।
सैन्य हमलों का उल्टा असर
फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने से पहले ईरान को एक ‘थ्रेसहोल्ड न्यूक्लियर स्टेट’ माना जाता था जिसके पास तकनीक तो थी लेकिन बम बनाने का राजनीतिक इरादा नहीं था। हालांकि, अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों ने इस सोच को बदल दिया है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के बजाय उसे और अधिक गुप्त और जमीन के भीतर धकेल दिया है। अब तेहरान अपनी बुनियादी संरचना को भविष्य के हमलों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाने के लिए उसे और मजबूत कर रहा है।
राजनीतिक बदलाव
ईरान के भीतर अब एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखा जा रहा है। दशकों से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का वह धार्मिक ‘फतवा’ एक ढाल की तरह काम करता था जिसमें परमाणु हथियारों को ‘हराम’ या इस्लाम में वर्जित बताया गया था। लेकिन अब ईरान के कट्टरपंथियों की आवाजें तेज हो गई हैं जो सार्वजनिक रूप से परमाणु बम बनाने की वकालत कर रहे हैं। ईरानी सांसदों के बीच अब परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की मांग जोर पकड़ रही है जो अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों को पूरी तरह खत्म कर सकती है।
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अस्तित्व की लड़ाई
तेहरान में अब यह सोच हावी हो रही है कि केवल Nuclear Deterrent ही शासन के अस्तित्व की रक्षा कर सकता है। यह तर्क दिया जा रहा है कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं वे बाहरी हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। इस प्रकार, परमाणु बम अब ईरान के लिए एक ‘बीमा पॉलिसी’ की तरह देखा जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने संघर्ष विराम के बदले ईरान के मुख्य परमाणु ठिकानों को बंद करने की शर्त रखी है, जिसे तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है।
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क्षेत्रीय परमाणु दौड़ का खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु बम बनाने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह मध्य पूर्व में ‘न्यूक्लियर प्रोलिफरेशन’ की एक खतरनाक श्रृंखला शुरू कर देगा। क्षेत्र के अन्य देश भी सुरक्षा के लिए अपने स्वयं के परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करेंगे जिससे पूरा क्षेत्र एक ‘मल्टी-न्यूक्लियर’ जोन बन जाएगा। फिलहाल, युद्ध की आग ईरान को उस अंतिम रेखा को पार करने के लिए मजबूर कर रही है जिससे दुनिया दशकों से बचने की कोशिश कर रही थी।
