अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Strait of Hormuz Missile Launch: मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को दुनिया एक बार फिर महायुद्ध की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक ऐसा खतरनाक मोड़ ले लिया है जिसने वैश्विक शांति के लिए खतरा पैदा कर दिया है।
ताजा घटनाक्रम में, ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइलें दागकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। इस घटना के तुरंत बाद अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में अपनी एक बड़ी सेना भेज दी है, जिससे युद्ध की आशंकाएं और अधिक गहरा गई हैं।
रिपोर्ट और ईरानी मीडिया के हवाले से यह खबर पुख्ता हुई है कि ईरान ने न केवल मिसाइलें दागी हैं बल्कि पर्शियन गल्फ के क्षेत्र में एक व्यापक वॉर एक्सरसाइज भी शुरू कर दी है। इस युद्धाभ्यास के दौरान ईरानी नौसेना ने कथित तौर पर एक काल्पनिक दुश्मन के युद्धपोत को उड़ाने का अभ्यास किया है। ईरान की यह आक्रामक सैन्य गतिविधि सीधे तौर पर उन धमकियों का जवाब मानी जा रही है जो पिछले कुछ समय से वॉशिंगटन से आ रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर हमले की धमकी दे रहे हैं। ट्रंप के कड़े रुख और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच अब युद्ध तय हो चुका है? कूटनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि क्या अगले 24 घंटों के भीतर अमेरिका ईरान पर कोई बड़ा हवाई या समुद्री हमला कर सकता है। ट्रंप बार-बार ईरान को ‘आंखें न दिखाने’ की चेतावनी दे रहे हैं लेकिन ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है। एक तरफ जहां पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य अंतरराष्ट्रीय हलचलें भी जारी हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई है जिसमें बड़ी रक्षा या व्यापारिक डील्स की घोषणा होने की संभावना है। इसी दौरान, बांग्लादेश में भी सत्ता परिवर्तन हुआ है और बीएनपी नेता तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है।
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ईरान और अमेरिका के बीच का यह सैन्य गतिरोध सबसे अधिक चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत सफल नहीं होती है, तो यह तनाव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज के शांत पानी में उठ रही मिसाइलों की लहरों और अमेरिका की अगली सैन्य चाल पर टिकी हैं।