ईरान में मार्शल लॉ लगा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Martial law imposed in Iran: ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। लगातार हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बढ़ती हिंसा के बीच अब पूरे देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयानों और धमकियों ने भी स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, हालात को काबू में करने के उद्देश्य से सरकार ने यह कठोर कदम उठाया है।
बीते कई दिनों से ईरान में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की शुरुआत देश में लगातार बढती महंगाई और अराजकता के विरोध में शुरु हुआ था, दो बाद में सत्ता परिवर्तन में बदल गया। प्रदर्शनकारी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सत्ता से हटाने और राजशाही की वापसी की मांग करते हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक इन प्रदर्शनों में अब तक 20,000 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की है, जिसमें इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद करना, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और सुरक्षा बलों की तैनाती शामिल है।
मार्शल लॉ लागू होने के बाद सरकार ने कई क्षेत्रों का नियंत्रण सीधे सैन्य बलों को सौंप दिया है। इस व्यवस्था के तहत सामान्य कानून व्यवस्था को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया जाता है और सेना को विशेष अधिकार दिए जाते हैं। इनमें कर्फ्यू लागू करना, सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाना और आवाजाही पर सख्त नियंत्रण जैसे कदम शामिल हैं। मार्शल लॉ के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी सैन्य बलों की होती है, ताकि हालात को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
ईरान में बीते 10 दिनों से लगातार प्रदर्शन जारी हैं। राजधानी तेहरान में 28 दिसंबर को विरोध की शुरुआत हुई थी, जो अगले ही दिन आसपास के कई शहरों में फैल गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं। 1 जनवरी के बाद स्थिति और अधिक हिंसक हो गई। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” करार दिया था। अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं और उनका इलाज अस्पतालों में चल रहा है।
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इतिहास पर नजर डालें तो ईरान में इससे पहले 8 सितंबर 1978 को मार्शल लॉ लगाया गया था। उस समय शाह मोहम्मद रेजा पहलवी ने तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में इसकी घोषणा की थी। मौजूदा हालात को देखते हुए एक बार फिर सरकार ने इसी कठोर कदम का सहारा लिया है, ताकि देश में फैलते असंतोष और हिंसा पर काबू पाया जा सके।
Ans: ईरान में आखिरी बार मार्शल लॉ 8 सितंबर 1978 को लगाया गया था। उस समय शाह मोहम्मद रेजा पहलवी ने तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में इसकी घोषणा की थी।
Ans: रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 20,000 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हैं।
Ans: प्रदर्शन की शुरुआत महंगाई और अराजकता के विरोध में हुई थी, लेकिन बाद में ये सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल गए। प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को हटाने और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।