ट्रंप को खामेनेई की खुली चेतावनी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran Hypersonic Missile Strategy: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है क्योंकि दोनों देशों के बीच हुई दो बड़ी बैठकों का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान के पास ऐसे गुप्त हथियार मौजूद हैं जो किसी भी विमानवाहक पोत को नष्ट कर सकते हैं।
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड जैसे युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। खामेनेई ने इन एयरक्राफ्ट कैरियर्स को खतरनाक मशीन बताते हुए दावा किया कि उनके पास इनसे भी अधिक विनाशकारी हथियार हैं जो इन्हें पल भर में डुबो सकते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है क्योंकि दोनों देशों के बीच हुई दो बड़ी बैठकों का कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इसी बीच अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करते हुए यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड जैसे युद्धपोत ईरानी सीमाओं के पास तैनात कर दिए हैं। इन हालातों को देखते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे शब्दों में एक बड़ी और गंभीर चेतावनी दे डाली है।
खामेनेई ने अपने हालिया बयान में कहा है कि उनके पास ऐसे गुप्त हथियार मौजूद हैं जो विशाल अमेरिकी युद्धपोतों को समुद्र की गहराई में हमेशा के लिए दफन कर सकते हैं। उन्होंने इन विमानवाहक पोतों को केवल खतरनाक दिखने वाली मशीनें बताया और दावा किया कि उनके हथियार इन मशीनों से कहीं अधिक विनाशकारी और जानलेवा साबित होंगे। हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट हथियार का नाम नहीं लिया लेकिन उनके इस प्रतीकात्मक संदेश ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ईरानी रक्षा विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास इस समय नूर, कादेर और गदीर जैसी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों का एक बहुत ही विशाल भंडार मौजूद है। माना जाता है कि इन घातक मिसाइलों की कुल संख्या 1,000 से 1,200 के बीच है जो एक साथ मिलकर किसी भी बड़े नौसैनिक बेड़े को तबाह करने के लिए काफी हैं। इसके अलावा नसर, राद और अबू महदी जैसी मिसाइलें भी अपनी मारक क्षमता और सटीक निशाने के कारण अमेरिकी सेना के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
हालांकि अमेरिकी नौसेना के पास दुनिया का सबसे शक्तिशाली एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम है जो उनके विमानवाहक पोतों की सुरक्षा के लिए हर समय पूरी तरह तैनात रहता है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलों का एक साथ हमला होना किसी भी सुरक्षा कवच के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है और इसी बात का फायदा ईरान उठाना चाहता है। यह साफ़ नहीं है कि ये मिसाइलें अमेरिकी जहाजों को कितना नुकसान पहुंचाएंगी लेकिन खामेनेई के शब्दों ने मनोवैज्ञानिक युद्ध की शुरुआत जरूर कर दी है।
खामेनेई ने अपने बयान में ईरान की ‘एरिया डिनायल’ रणनीति पर विशेष जोर दिया है जो मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में केंद्रित मानी जाती है। इस रणनीति का उद्देश्य दुश्मन की नौसेना को किसी विशेष क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकना या वहां उनकी गतिविधियों को पूरी तरह से बाधित करना होता है। ईरान की यह समुद्री उपस्थिति विश्व व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक पर उसकी मजबूत पकड़ और वर्चस्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
मिसाइलों के अलावा ईरान ने समुद्र की गहराइयों में बारूदी सुरंगें बिछाने और उन्नत टॉरपीडो का उपयोग करने की अपनी क्षमता को भी काफी हद तक विकसित और मजबूत कर लिया है। उनके पास बड़ी संख्या में मानव रहित हवाई वाहन यानी ड्रोन और समुद्री वाहन भी हैं जो दुश्मन की निगरानी करने और उन पर आत्मघाती हमले करने में सक्षम हैं। इन सभी हथियारों का तालमेल ईरान को एक ऐसी शक्ति बनाता है जिसे समुद्र के किसी भी हिस्से में नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए घातक हो सकता है।
खामेनेई की यह चेतावनी केवल शब्दों तक सीमित नहीं है बल्कि यह ईरान की अपनी समुद्री सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा के लिए उसकी गंभीरता का प्रमाण है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में ईरान अपने सैन्य संसाधनों को लगातार आधुनिक बना रहा है ताकि वह किसी भी संभावित अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ और प्रभावी जवाब दे सके। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में व्हाइट हाउस और पेंटागन इस सीधी चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्षेत्र में शांति कैसे बनी रहती है।