ईरान-इजरायल के बीच जंग (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Israel War Economic Impact: ईरान और इजरायल के बीच जंग अब छह दिनों से जारी है, और दोनों तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं। इस संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं, लेकिन किसी भी देश की ओर से युद्ध रोकने की कोई पहल नहीं की गई है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं, जबकि ईरान अकेले ही पलटवार कर रहा है। इस हवाई युद्ध का इजरायल की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
इजरायल के वित्त मंत्रालय के अनुसार, ईरान के साथ जारी हवाई संघर्ष से देश को हर हफ्ते करीब 9 अरब शेकेल (लगभग 2.93 अरब अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हो सकता है। भारतीय रुपये में इसका आंकड़ा लगभग 27,000 करोड़ रुपए प्रति हफ्ता है। इसका मतलब यह है कि युद्ध इजरायल के लिए भी भारी आर्थिक बोझ बन गया है। यदि यह युद्ध जारी रहता है, तो आर्थिक नुकसान और बढ़ सकता है।
युद्ध का असर देश की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इजरायल के होम फ्रंट कमांड ने कई कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत केवल जरूरी कर्मचारियों को ही काम करने की अनुमति है, स्कूल बंद हैं, और रिजर्व सैनिकों की बड़े पैमाने पर तैनाती की जा रही है। ज्यादातर सार्वजनिक और व्यावसायिक गतिविधियां स्थगित हैं, और अधिकांश कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। इसके कारण अगले हफ्ते से अर्थव्यवस्था को 9.4 अरब शेकेल प्रति हफ्ते का नुकसान होने का अनुमान है।
वित्त मंत्रालय ने होम फ्रंट कमांड को निर्देश दिया है कि प्रतिबंधों को रेड (सबसे कड़ा) से घटाकर ऑरेंज (कम सख्त) किया जाए। यदि अगले एक-दो दिनों में यह बदलाव होता है, तो कामकाजी ऑफिसों में कुछ राहत मिल सकती है। इससे युद्ध और वर्क फ्रॉम होम के कारण प्रभावित गतिविधियां पूरी की जा सकेंगी, और आर्थिक नुकसान लगभग 4.3 अरब शेकेल प्रति हफ्ते तक घट सकता है। हालांकि, अभी तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है।
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हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इजरायल की अर्थव्यवस्था युद्ध से प्रभावित हुई है। पहले हमास के साथ संघर्ष के दौरान भी अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ था, जिसका पूरा असर अभी तक नहीं भरा गया है। इसके बावजूद, 2025 में इजरायल की अर्थव्यवस्था 3.1% की दर से बढ़ी थी। अक्टूबर में युद्ध विराम के बाद 2026 में 5% से अधिक विकास की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन ईरान के साथ बढ़ता संघर्ष अब इन आर्थिक अनुमानों में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। यही वजह है कि वित्त मंत्रालय युद्ध के बावजूद आर्थिक गतिविधियों और नुकसान को कम करने पर काम कर रहा है।