ईरान ने इजराइल पर क्लस्टर बमों से किया हमला (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान के क्लस्टर बम हमले से दहला इजराइल… घातक मिसाइल तकनीक के पीछे इन देशों गहराया शक

Iran Israel Conflict: ईरान ने इजराइल पर पहली बार विवादित क्लस्टर बमों से हमला किया है, जिससे तेल अवीव सहित कई इलाकों में भारी तबाही हुई है। इजराइल को इस तकनीक के पीछे रूस और चीन का हाथ होने का शक है।

प्रिया सिंह

Iran Cluster Bomb Attack Israel: ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग अब एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है जिससे पूरी दुनिया में दहशत है। इजराइली अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने पहली बार इजराइल पर क्लस्टर बमों से लैस घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ये हथियार हवा में ही फटकर दर्जनों छोटे बमों को एक बड़े इलाके में फैला देते हैं, जो शहरी आबादी के लिए बड़ा खतरा हैं। इजराइल को शक है कि ईरान को यह उन्नत और विनाशकारी तकनीक रूस या चीन से प्राप्त हुई है।

आसमान से बरसती मौत और तबाही

ईरानी मिसाइलों का हमला करने का तरीका अब पूरी तरह बदल गया है जो पहले से कहीं अधिक घातक और डरावना है। ये मिसाइलें जमीन से टकराने से करीब चार से सात किलोमीटर पहले ही हवा में फट जाती हैं और छोटे बम बिखेर देती हैं। हाल ही में तेल अवीव के पास अजोर शहर में एक घर पर बम गिरने से पूरी इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है। 28 फरवरी से अब तक हुए इन हमलों में कम से कम 11 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और अस्पतालों में घायलों की भीड़ बढ़ती जा रही है। ईरान अब एक साथ भारी हमले करने के बजाय रुक-रुक कर सटीक क्लस्टर मिसाइलें दागकर दहशत फैला रहा है।

रूस और चीन की भूमिका पर सवाल

इजराइली सेना के विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्लस्टर मिसाइलों को रोकना सामान्य मिसाइलों की तुलना में काफी ज्यादा मुश्किल है। इजराइल को गहरा संदेह है कि ईरान ने यह जटिल तकनीक खुद विकसित नहीं की है बल्कि उसे बाहर से मदद मिली है। इस घातक सैन्य काबिलियत के पीछे रूसी या चीनी सेना का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।

रूस द्वारा यूक्रेन युद्ध में पहले भी क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किए जाने से यह शक और भी ज्यादा मजबूत हो गया है। इजराइल का कहना है कि यह केवल एक सैन्य हमला नहीं है बल्कि यह पता लगाना भी जरूरी है कि तकनीक वहां कैसे पहुंची। इन देशों की संभावित संलिप्तता ने मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष में एक नई और खतरनाक हलचल पैदा कर दी है।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों की उलझन

क्लस्टर बमों को दुनिया भर में विवादित माना जाता है क्योंकि इनके छोटे बम लंबे समय तक फटने का इंतजार करते रहते हैं। साल 2008 में एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के जरिए 111 देशों ने इन हथियारों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। हालांकि हैरानी की बात यह है कि ईरान और इजराइल दोनों ने ही इस समझौते पर अब तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

यहां तक कि अमेरिका भी इस मानवीय संधि का हिस्सा नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों की पेचीदगी को और बढ़ा देता है। ईरान अपने इन हथियारों की क्षमता को हमेशा गोपनीय रखता था लेकिन अब इनका खुलकर इस्तेमाल चुनौती बन गया है। उसकी बढ़ती सैन्य ताकत अब पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी साबित हो रही है।

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