ईरान की कई ऐतिहासिक विरासतों पर जंग की मार (सोर्स-सोशल मीडिया)
UNESCO Global Heritage Protection: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच मानवीय जान-माल के साथ-साथ अब दुनिया की साझा विरासत भी खतरे में है। हाल ही में ईरान पर हुए हमलों ने हजारों साल पुराने इतिहास को गहरे जख्म दिए हैं। UNESCO वैश्विक विरासत संरक्षण के तहत आने वाले कई स्थल अब खंडहर बनने की कगार पर पहुंच गए हैं। यह हमला केवल एक देश पर नहीं, बल्कि समूची मानव सभ्यता और उसकी प्राचीन पहचान पर एक बड़ा प्रहार है।
ईरान में अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग के कारण सदियों पुराने महल और मस्जिदें भारी नुकसान का सामना कर रहे हैं। तेहरान में स्थित कजार युग का भव्य गुलिस्तान पैलेस और इस्फहान का प्रसिद्ध चेहेल सोतौन पैलेस हमलों की चपेट में आए हैं। यूनेस्को ने पुष्टि की है कि इन हमलों से ईरान की सबसे पुरानी मस्जिद-ए-जामे की दीवारों और छतों को गंभीर क्षति पहुंची है।
तबाही का मंजर केवल महलों तक सीमित नहीं है बल्कि खुर्रामाबाद घाटी में स्थित प्रागैतिहासिक गुफाएं भी इसकी चपेट में आ गई हैं। इन गुफाओं में लगभग 63 हजार ईसा पूर्व के मानवीय जीवन के प्राचीन अवशेष मौजूद हैं जो अब पूरी तरह असुरक्षित हो चुके हैं। गुलिस्तान पैलेस की शानदार शीशे वाली छतों और मेहराबों के टूटने से वहां की प्राचीन वास्तुकला को अपूरणीय क्षति हुई है।
ईरान सरकार ने सोशल मीडिया पर सनंदाज की ऐतिहासिक इमारतों जैसे आसिफ हवेली और खुसरो आबाद हवेली की तस्वीरें साझा कर तबाही दिखाई है। हमलों के कारण इन इमारतों की सदियों पुरानी नक्काशी, सुंदर आईनाकारी और प्राचीन खिड़कियां पूरी तरह से चकनाचूर होकर फर्श पर बिखर गई हैं। यह केवल पत्थरों का नुकसान नहीं है बल्कि उस समाज की सांस्कृतिक पहचान को हमेशा के लिए मिटाने जैसा कृत्य है।
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ईरान के विदेश मंत्री ने इन हमलों पर कड़ी चिंता जताते हुए यूनेस्को से इन स्थलों को विशेष सुरक्षा सूची में डालने की मांग की है। हालांकि यूनेस्को ने युद्ध में शामिल पक्षों को इन स्थलों की सटीक भौगोलिक स्थिति पहले ही बता दी थी ताकि उन्हें बचाया जा सके। इसके बावजूद इन ऐतिहासिक विरासतों का तबाह होना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्राचीन सभ्यताओं के संरक्षण के प्रति एक बहुत बड़ी विफलता है।