
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Abbas Araghchi Turkey Visit: ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव का खतरा अपने चरम पर पहुंच गया है। इस संभावित विनाशकारी संघर्ष को रोकने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को तुर्किये की राजधानी अंकारा की यात्रा जा रहे हैं। तुर्किये के राजनयिक तेहरान को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि उसे अमेरिकी हमले से बचना है, तो अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ रियायतें देनी ही होंगी।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि दोनों देशों के बीच एक दशक से जारी सीधे संवाद के गतिरोध को तोड़ा जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास समझौते के लिए समय बहुत कम बचा है। उन्होंने संकल्प लिया है कि अमेरिका का हमला वेनेजुएला में हुए हस्तक्षेप से कहीं अधिक हिंसक और व्यापक होगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने जून में हुए 12-दिवसीय युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर दिया था, हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस दावे पर अलग-अलग राय रखती हैं।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह कूटनीति के साथ-साथ सैन्य मुकाबले के लिए भी खुद को तैयार कर रहा है। ईरानी सेना के प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने घोषणा की है कि जून युद्ध के बाद से ईरान ने अपनी रणनीति बदली है और 1,000 नए समुद्र एवं जमीन आधारित ड्रोन तैयार किए हैं। उन्होंने दावा किया कि ये ड्रोन और ईरान का मिसाइल भंडार किसी भी हमले का ‘मुंहतोड़ जवाब’ दे सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सबसे बड़ी सैन्य कमजोरी उसका हवाई रक्षा तंत्र है।
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को हमले से बचने के लिए वाशिंगटन की चार प्रमुख मांगों को पूरा करना होगा:
तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने स्वीकार किया है कि ईरान के लिए इन शर्तों को स्वीकार करना ‘अपमानजनक’ और नेतृत्व के लिए समझाना मुश्किल हो सकता है।
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संभावित युद्ध की आशंका से पूरे मिडिल ईस्ट में घबराहट का माहौल है। खुद को ईरानी जवाबी कार्रवाई से बचाने के लिए, अधिकांश खाड़ी देशों ने घोषणा की है कि वे अपने हवाई क्षेत्र या क्षेत्र का उपयोग ईरान पर हमला करने के लिए नहीं करने देंगे। तुर्किये ने भी चेतावनी दी है कि ईरान पर हमला करना गलत होगा और तेहरान को क्षेत्र में विश्वास बहाली पर ध्यान देना चाहिए।






