उधर US डेलिगेशन को ट्रंप ने दिखा दी हरी झंडी, इधर ईरान ने कर दिया मीटिंग का बॉयकॉट, अधर में फंसी शांति वार्ता!
US-Iran Talks: इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता अनिश्चितता में है। ईरान ने बैठक में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा है कि अमेरिकी नाकेबंदी खत्म हुए बिना बातचीत संभव नहीं होगी।
- Written By: अक्षय साहू
ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत से इनकार किया (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Rejects Second Round of Talks With US: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए दूसरे दौर की शांति वार्ता प्रस्तावित है। इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकना और किसी समझौते तक पहुंचना है। अमेरिका ने अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने की पुष्टि कर दी है, लेकिन ईरान की ओर से इसमें शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अल जजीरा ने ईरानी तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया है कि ईरान ने फिलहाल पाकिस्तान में होने वाली इस वार्ता के लिए कोई प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय नहीं लिया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक वे बातचीत के लिए आगे नहीं बढ़ेंगे। यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि ईरान मौजूदा हालात में किसी भी वार्ता को प्रभावी नहीं मान रहा।
आज इस्लामाबाद पहुंचेगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचेगा। इस टीम का नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे और उनके साथ ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे। बताया गया है कि यह दल 20 अप्रैल की रात तक इस्लामाबाद पहुंच जाएगा। हालांकि इस बार अमेरिका की उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगी।
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वार्ता से पहले ट्रंप की चेतावनी
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने एक सख्त चेतावनी भी दी है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए, तो ईरान के बुनियादी ढांचे जैसे पुल और पावर प्लांट को निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
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जहां एक ओर अमेरिका बातचीत के लिए तैयार नजर आ रहा है, वहीं ईरान की शर्तों ने शांति प्रक्रिया को अनिश्चित बना दिया है। माना जा रहा है कि यह ईरान की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का मुद्दा उठाकर वार्ता को टालने की कोशिश कर रहा है, ताकि बैठक से पहले अमेरिका पर नाकेबंदी हटाने का दबाव बनाया जा सके।
